स्वच्छता की पहल: बेकार प्लास्टिक की बोतलों से बना दिया इको फ्रेंडली शौचालय

प्रेरणादायक

बेकार प्लास्टिक की बोतलों से शौचालय का निर्माण। यह पढ़कर चौंकिए नहीं। यह हो रहा है पश्चिम चंपारण में। यहां बगहा दो प्रखंड के पहाड़ी इलाके में, जहां ईंट की किल्लत होती है, हर घर में शौचालय बनाने की अनोखी पहल की गई है। इसके लिए स्वयंसेवी संस्था ‘गूंज’ ने अनोखा तरीका अपनाया है। यहां प्लास्टिक की बेकार बोतलों से शौचालय का निर्माण हो रहा है। चंपापुर गांव में इस तरह का एक शौचालय बनकर तैयार है। ऐसे शौचालय बनवाने के लिए इलाके में जागरूकता फैलाई जा रही है।

ऐसे आया शौचालय बनाने का आइडिया

स्वयंसेवी संस्था ‘गूंज’ के कार्यकर्ता और वाल्मीकिनगर निवासी अजय झा ने नेपाल से निकली गंडक नदी में प्लास्टिक की बोतलें व लकड़ी बहकर आते देखा। लोग लकड़ी तो निकाल लेते, लेकिन बोतल छोड़ देते थे। उन्होंने इन बोतलों का सदुपयोग करने की सोची। अध्ययन किया तो नाइजीरिया में बोतलों से शौचालय बनाने की जानकारी मिली।

चंपापुर गांव में किया गया पहला प्रयोग

फिर क्या, आनन-फानन में पहला प्रयोग चंपापुर गांव में किया। इस शौचालय की दीवारें पूरी तरह प्लास्टिक की बोतलों से बनाई गईं। संस्था के बिहार समन्वयक शिवजी चतुर्वेदी ने बताया कि पानी की बेकार बोतलों में मजबूती के लिए बालू भर दी जाती है। इस तरह के शौचालय बनाने के लिए जागरूकता भी फैलाई जा रही है।

शौचालय देखने दूर-दूर से पहुंच रहे लोग

बगहां का यह सार्वजनिक शौचालय कौतूहल का केंद्र है। प्रतिदिन लोग इसे देखने आ रहे हैं। लोग इससे प्रेरित हो रहे हैं। कई ग्रामीण बोतलों का इस्तेमाल कर शौचालय बनाने में जुट गए हैं।

ईको फ्रेंडली शौचालय बनाना आसान, खर्च भी मामूली

ग्रामीण रामेश्वर काजी और प्रमोद महतो का कहना है कि पहाड़ी इलाके में एक तो ईंट मिलने में समस्या, ऊपर से एक की कीमत सात से आठ रुपये है। ऐसे में आर्थिक कारणों से अधिकतर घरों में शौचालय नहीं है। लेकिन, इस तरह का ईको फ्रेंडली शौचालय बनाना आसान है। खर्च भी मामूली है। इसे कोई भी बना सकता है।

खुले में शौच से मिलगी मुक्ति

ग्रामीणों ने बताया कि ऐसे शौचालय बनाए जांच तो खुले में शौच की प्रवृत्ति बंद होगी। अब तक बेकार बोतलों को नदी में फेंक दिया जाता था, जिससे प्रदूषण बढ़ता था। अब इससे भी मुक्ति मिलेगी।


पीएम मोदी को सांसद बताएंगे तकनीक

वाल्मीकिनगर के सांसद सतीशचंद्र दुबे को यह तकनीक इतनी पसंद आई कि उन्होंने इस मॉडल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष प्रस्तुत करने की बात कही है। बगहा के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) प्रणव कुमार गिरी का कहना है कि इस तरह का शौचालय खुले में शौच से मुक्ति में काफी उपयोगी साबित होगा। उन्‍होंने कहा कि अभी शौचालय देखा नहीं है। मौके पर जाकर शौचालय देखेंगे, फिर इसकी जानकारी शासन को देंगे।

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