भगवती की पूजा से मिलती है अद्भुत शक्ति, माँ से बढ़कर नहीं कोई दूसरी शक्ति

आस्था

ऐसे तो महामाया की आराधना के कितने ही आधार तत्व वेद-पुराण, स्मृति व उपनिषद् आदि ग्रंथों में हैं, लेकिन इन सब में श्री दुर्गा सप्तशती का विशेष मान है। इसे मातृ आराधना का का सेतु कहा गया है।

दुर्गा सप्तशती के द्वितीय अध्याय से मातृ महिमा का विशद् वर्णन है और ज्ञात होता है कि कोटि-कोटि देवताओं के दिव्यांश से मातृ देवी की उत्पत्ति हुई है।

यही कारण है कि शक्ति, बल, शौर्य व महिमा में मां का नाम सबसे ऊपर है। देवी जी का मुख शिवशंकर के तेज से, सिर में बाल यमराज के तेज से, भुजाएं श्री विष्णु के तेज से, दोनों चरण ब्रह्मा के तेज से और अंगुलियां सूर्य के तेज से प्रकट हुईं।

हाथों की अंगुलियां वसुओं के तेज से, नासिका कुबेर के तेज से, दंत प्रजापति के तेज से, तीनों नेत्र अग्नि के तेज से, भवें संध्या के तेज से और कान वायु के तेज से प्रकट हुए।शरीर के बाद वस्त्र-आभूषण और श्रृंगार की चर्चा आई है।

भगवान शिव से शूल, विष्णु से चक्र, वरुण से शंख, अग्नि से शक्ति, वायु से धनुष व वाण भरे दो तरकश, इंद्र से वज्र और घंटा, यमराज से दंड, वरुण से पाश, प्रजापति से स्फटिकाक्ष की माला जी से कमंडल प्राप्त हुआ।

सूर्यदेव ने उनके रोमकूपों में किरणों का तेज भर दिया तो काल देवता ने उन्हें चमकती हुई ढाल व तलवार प्रदान की।

क्षीरसमुद्र ने हार और सदैव नवीन रहने वाले द्वय वस्त्र प्रदान किए, कुंडल, कड़ा, नुपूर, हंसली व अंगूठियों से उन्हें श्रृंगारित किया।

विश्वकर्मा ने निर्मल फरसा, अस्त्र व अभेद्य कवच तो जलधि ने सुंदर फूलों की मालाएं दीं। कुबेर ने मधु से भरा पात्र तो शेषनाग ने नागहार प्रदान किया।

इस प्रकार मां दुर्गा सभी देवी-देवताओं के अंश से उत्पन्न और श्रृंगारित हैं। तभी तो वे सभी देवगणों में सर्वाधिक बलशाली हैं। देवी पुराण में अंकित है कि एकमेव देवी की आराधना से सभी देवता प्रसन्न होते हैं।

सचमुच देवी परम कल्याणकारी व महाशक्ति स्वामिनी हैं, जिनकी कृपा से हरेक कार्य सहज व रूरल रूप से सम्पन्न हो जाता है।

इन नौ वस्तुओं से करें मां दुर्गा की पूजा, खुल जाएगा आपकी किस्मत का ताला

आपको बता दे कि 21 सितंबर से नवरात्रें शुरु होने वाले है जिसमें सभी हिन्दू लोग मां दुर्गा की विधि पूर्वक पूजा पाठ करते है। स्त्री हो या पुरुष सभी लोग नौ देवियों का नौ दिन तक व्रत रखकर पूजा पाठ करते है।

जो भी कोई व्यक्ति नवरात्रों में विधि विधान से माता रानी की पूजा करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

 

नवरात्रों को शुरु होने में केवल 2 दिन बचे है।मां दूर्गा के पूजा पाठ से जुड़ी ऐसी बहुत सी बातें है जो कि सभी लोग नही जानते है। जिसके कारण जैसा उनके मन में आता है वैसे ही पूजा कर लेते है। इन नवरात्रों में पूजा का बहुत ही महत्व होता है।

जिसके कारण आज हम आपको बताएंगे कि कैसे करनी चाहिए नौ नवरात्रों में दुर्गा की पूजा। वह कौन-कौन सी चीजें है जो हमें पूजा में इस्तेमाल करनी चाहिए।

 

माँ दुर्गा के नवरात्र के पहले दिन प्रतिपदा को गौ घृत से षोडशौपचार पूजा कर गौ धृत माता को अपर्ण करना चाहिए। इससे आरोग्य लाभ होता है। नवरात्र के दूसरे दिन शक्कर का भोग दान करें, यह लंबी आयु के लिए होता है।

तीसरे दिन पूजन में माता को दूध चढ़ाएं और उसे ब्राह्मण को दान करें। इससे मुक्ति मिलती है।चौथे दिन मालपुआ का नैवेद्य अर्पण करें। इससे निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।

 

पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा करके भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद ब्राह्मण को दान कर देना चाहिए। इस उपाय को करने से बुद्धि का विकास होता है।

छठे दिन को कात्‍यायनी षष्ठी कहते हैं। इस दिन मां के पूजन में मधु (शहद) चढ़ाएं। इसके उपाय से सुंदर रूप प्राप्‍त होता है।

सातवें दिन मां कालरात्रि भगवती की पूजा में गुड़ का नैवेद्य अर्पित करके ब्राह्मण को दान करना चाहिए। इससे व्यक्ति शोकमुक्त होता है।

आठवां (अष्‍टमी) के रूप में मानते हैं। इस दिन महा गौरी को नारियल का भोग लगाना चाहिए। इसके बाद नारियल को सिर से घुमाकर बहते हुए जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। कहते है इससे सभी इच्‍छाएं पूरी होती हैं।

 

नौंवे दिन (नवमी तिथि) मां सिद्धिदात्री को तरह-तरह के पकवान बनाने चाहिए जैसे हलवा, चना-पूरी, खीर और पुए बनाकर चढ़ाना चाहिए और गरीबों को प्रसाद के रूप में बांटना चाहिए। यह करने से जीवन में सुख-शांति मिलती है।

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