दुनिया के सबसे पुराने गणराज्य के तौर पर गौरवपूर्ण है वैशाली का इतिहास, पर्यटकों को आकर्षित करती हैं ये 3 जगहें

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वैशाली बिहार में एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है जो कभी लिच्छवी शासकों की राजधानी थी। अंतिम जैन तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्मस्थान और विश्व के सबसे पुराने गणराज्य के रूप में वैशाली भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित किया गया और देश विदेश में ख्याति पाई। ऐसा माना जाता है कि जैन धर्म के सबसे प्रभावी तीर्थांकर महावीर का जन्म और पालन-पोषण छठी शताब्दी ईसा पूर्व वैशाली गणराज्य के कुंडलग्राम में हुआ था। बौद्ध धर्म के केंद्र के रूप में यह स्थान 483 ईसा पूर्व में बुद्ध का अंतिम उपदेश का साक्षी बना। बुद्ध के समय में वैशाली एक समृद्ध राज्य था, यह अपने खूबसूरत दरबारी आम्रपाली के लिए भी जाना जाता है। इस प्राचीन शहर का उल्लेख प्रसिद्ध चीनी यात्रियों  फाह्यान और ह्वेनसांग के यात्रा वृत्तांतों में मिलता है। वैशाली में पर्यटकों के लिए घूमने की 3 सबसे खास जगहों में अशोक स्तम्भ, विश्व शांति पैगोडा और वैशाली में बना शानदार म्यूजियम है।

अशोक स्तम्भ

सम्राट अशोक द्वारा बनवाया गया स्तम्भ की खास विशेष यह है कि स्तम्भ के ऊपर शेर की प्रतिमा बनायी गयी है। स्तम्भ से सटा हुआ स्तूप बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए आकर्षण का खास केंद्र है। इस ऐतिहासिक स्तूप और स्तम्भ का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा किया जा रहा है। स्तूप और स्तम्भ की खुदाई के दौरान मिले ऐतिहासिक साक्ष्यों को वैशाली में बने म्यूजियम में रखा गया है।

विश्व शांति पैगोडा

बौद्ध धर्म के केंद्र के रूप में वैशाली देश विदेश के बौद्ध मतावलंबियों के आकर्षण का केंद्र है। बिहार और देश विदेश के अलग अलग हिस्से से लोग यहां आते हैं। विश्व शांति पैगोडा पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। बौद्ध धर्म के विदेशी अनुयायिओं ने इस पैगोडा का निर्माण कराया है। विश्व में शांति की कामना के साथ पैगोडा बनवाया गया है।

वैशाली म्यूजियम

वैशाली के इतिहास की विरासत को वैशाली म्यूजियम में संभाल कर रखा गया है। म्यूजियम में उत्खनन से मिली पुरातात्विक वस्तुओं को संरक्षित किया गया है। वैशाली के इतिहास के बारे में जानने और पुरावस्तुओं को देखने के लिए वैशाली म्यूजियम सबसे बेहतर स्थल है।

वैशाली सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। पटना एयरपोर्ट विदेशी पर्यटकों के लिए नजदीकी केंद्र है। रेल मार्ग से मुजफ्फरपुर तक पहुंचा जा सकता है। मुजफ्फरपुर से वैशाली की दूरी लगभग 40 किलोमीटर है। पर्यटन का खास केंद्र होने के बावजूद वैशाली का विकास धीमी गति से हो रहा है। कई योजनाओं पर काम चल रहा है और विकास के बाद पर्यटन केंद्रों पर पर्यटकों की भीड़ बढ़ जाएगी। वैशाली में अन्य घूमने की जगहों में कुटाग्रशाला विहार, बावन पोखर मंदिर, कुंडलपुर और चौमुखी महादेव मंदिर है।

 

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