dowry case kota doctor

जयमाल से पहले मांगे दहेज़ में एक करोड़ तो डॉक्टर दुल्हन ने यह कह लौटा दी बरात…

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कोटा का बृज विलास भवन जगम रोशनी से नहा रहा था। मेहंदी की रस्म अदा हो चुकी थी। बारात की आगवानी की तैयारियां जोरशोर से चल रही थीं। बारात पहुंची तो भव्य स्वागत किया गया। धूमधाम के साथ घुड़चढ़ी की रस्म अदा की गई। बाराती खाना खाने में लगे हुए थे। जयमाल की रस्म अदा होना शेष थी। इसी बीच हाईप्रोफाइल डॉक्टर के पिता ने दहेज में एक करोड़ की डिमांड रख दी। बात डॉक्टर दुल्हन तक पहुंची। फिर क्या था दुल्हन ने जयमाला कार्यक्रम बीच में रोकते हुए शादी से इनकार कर दिया। दोनों पक्षों के बीच जमकर तकरार हुई। पुलिस ने हस्तक्षेप कर मामला निपटाया। लड़की के इस फैसले में माता-पिता ने भी साथ देते हुए सजे-धजे पांडाल से दूल्हे समेत पूरी बरात को ही लौटा दिया था। परिवार यह फैसला शाम को ले चुका था, लेकिन रात करीब 9.30 बजे तक किसी को नहीं बताया।

मेहमानों ने खाना खाया उसके बाद दुल्हन के पिता ने स्टेज से सभी से अपने मन की बात कही।दुल्हन बिना बारात को बैरंग लौटना पड़ा। दुल्हन के पिता ने डाक्टर दूल्हे, पिता समेत पांच के खिलाफ कोटा में मुकदमा दर्ज कराया है।

मामला शहर के हाईप्रोफाइल दंत रोग विशेषज्ञ का है। वह दिल्ली रोड के रहने वाले हैं। मूलरूप से ग्वालियर के हैं। पिता इंजीनियर थे। कुछ समय पहले सेवानिवृत हुए हैं। शहर के हाईप्रोफाइल दंत रोग विशेषज्ञ की शादी कोटा निवासी मशहूर डाक्टर रवीश सक्सेना की बेटी राशि से तय हुई थी। राशि भी दंत रोग विशेषज्ञ है। रविवार को धूमधाम के साथ बारात कोटा के बृज विलास भवन पहुंची। बारात की भव्य आगवानी की गई। बारात में मौजूद शहर के डाक्टर भी आगवानी के कायल नजर आए। व्यवस्थाएं देखते बन रही थीं। घुड़चढ़ी की रस्म अदा की गई। जयमाला के लिए डाक्टर बहू तैयार थी। बारात का शानदार स्वागत व भव्य व्यवस्था देखकर डाक्टर दूल्हे के पिता के मन में लालच आ गया। उन्होंने दहेज में एक करोड़ की मांग कर डाली। थोड़ी ही देर में बात डाक्टर दुल्हन तक पहुंची। उसने सख्त फैसला लेते हुए जयमाला का कार्यक्रम निरस्त कर दिया। साथ ही, बारात बैरंग लौटाने का भी फैसला किया।

लोगों की मध्यस्ता के जरिए दोनों पक्षों के बीच समझौते की कवायद हुई। दुल्हन के परिवार वाले बदनामी के डर के कारण शादी के लिए राजी भी हो गए, लेकिन डॉक्टर दुल्हन ने फैसला बदलने से इनकार कर दिया। सजी-धजी दुल्हन ने किसी की बात सुनने से इनकार कर दिया। इसके बाद दुल्हन के पिता ने मंच से बारात में शामिल होने आए कोटा के लोगों का धन्यवाद किया। बारात लौटाने का भी निर्णय का मंच से ऐलान किया। इस दौरान वह सभी के सामने हाथ ही जोड़ते नजर आए।

बेटी के साहस को सभी ने सराहा

बारात में शामिल बड़ी संख्या में लोगों ने दुल्हन के साहस की जमकर सराहना की। वहीं कोटा के लोग भी बेटी की बहादुरी की कायल नजर आई। नाम न छापने पर बारात में शामिल एक डाक्टर ने बताया कि दुल्हन के पिता ने शुरुआत में रिश्ते को टूटने से बचाने की भरसक कोशिश की, लेकिन दूल्हे के इंजीनियर पिता कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं थे।

दुल्हन बनी डॉ. राशि ने बरात लौटाने का बोल्ड फैसला कैसे लिया? शादी के पहले फैसला लेने वाले उन लम्हों की कहानी, खुद दुल्हन की जुबानी-

लड़के वाले दहेज मांग रहे थेडॉ. राशि सक्सेना के मुताबिक, मैं शादी से बहुत खुश थी और बृजराज पैलेस में मेरी सहेलियों के साथ बैठी थी। सात फैरे लेकर मुझे मेरा दूल्हा डोली में बैठाकर ले जाने वाला था और मन में बस उसी के ख्याल चल रहे थे।

चंद घंटों पहले पापा-मम्मी टेंशन में मेरे पास आए और बोले- राशि बेटा, हमें आपसे बात करनी है, आप तुरंत अकेले चलिए। पापा-मम्मी मुझे अकेले कार में ले गए और बताया कि दूल्हे पक्ष वाले दहेज मांग रहे है तो मैं शॉक्ड रह गई। जो लड़का मेरा दूल्हा बनने वाला था और मैं पिछले दो महीनों से फोन पर बात कर रही थी, लेकिन कभी कोई ऐसी डिमांड सामने नहीं आई थी।

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लड़की नहीं सह पाई पापा की बेइज्जती

मैंने तुरंत फोन उठाया और कार से ही उसे फोन करके गुस्से भरे अंदाज में ही पूछा कि तुम्हारे पापा-मम्मी शादी के ठीक पहले यह कैसी डिमांड रख रहे हैं? मुझे ऐसी उम्मीद नहीं थी। वह कुछ बोल नहीं सका, ऐसे रिएक्ट किया जैसे उसे ज्यादा कुछ पता नहीं था।

सच बताऊं तो मेरे होने वाले सास-ससुर और पति सबकी यह सोची-समझी प्लानिंग थी। मैं उससे बोली की ऐसी कंडीशन में अब मुझे शादी करनी है या नहीं यह सोचने के थोड़ा टाइम चाहिए। मुझे दूसरा धक्का तब लगा जब वो मेरी इस स्टूपिड शर्त को मानने के लिए सरलता से मान गया। मैंने फोन काट दिया और कार में चुपचाप बैठ गई।

पापा ने कार रोकी और मेरी तरफ देखते हुए पूछा कि बेटा तेरा क्या फैसला हैं? क्या डिमांड पूरी करनी चाहिए? सच में मुझे बिल्कुल पता नहीं था कि पापा-मम्मी की मेरे होने वाले सास-ससुर से क्या बात हुई? बस जाने कहां से इतनी हिम्मत आई और मैंने सीधे बोल दिया की दूल्हे और उसकी बरात को वापस भेज दो, मुझे यह शादी नहीं करनी हैं।

मेरे इस बोल्ड फैसले से पापा भौचक्के रह गए। उन्होंने मुझसे करीब 10 बार पूछा की बेटा यह तेरा अाखिरी फैसला है क्या? मैं बोली पापा इसमें सोचने वाली बात ही क्या हैं? आप भी यही चाहते तो हो लेकिन, बस मुझे देखकर बोल नहीं पा रहे। मैंने साफ कहा कि पापा, मुझे लड़के बहुत मिल जाएंगे लेकिन, मैं ऐसे परिवार पर बिल्कुल भरोसा नहीं कर सकती, जो शादी के एेनवक्त पर आपसे दहेज की डिमांड कर दे।

मैं अगर उस वक्त मम्मी-पापा की इज्जत… समाज क्या कहेगा… मुझसे कौन शादी करेगा…. इस टाइप के फालतू सवाल दिमाग में लाती तो जिंदगी भर दुख पाती और पापा को दुखी करती। मेरी जिंदगी नरक बन जाती। मेरा हर बेटी से यही कहना है कि दहेज के दानव का अंत शादी के पहले उसी वक्त कर दो जब वो मुंह फाड़ रहा हो।

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