दोगुनी हुई एसएसबी की ताकत, महिला कमांडो भी कर रही हैं भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा; गुरिल्ला वार सहित क्लोज कॉम्बैट तक की मिली है ट्रेनिंग

कही-सुनी

भारत-नेपाल सीमा पर पुरुष एसएसबी के जवानों के साथ महिला कमांडो की टोली ने कंधे से कंधा मिलाकर सीमा सुरक्षा की कमान संभाल ली है। बेखौफ, निडर महिला कमांडो सीमा पर तस्करी और अपराध को नियंत्रित करने में लगी हुई हैं। गुरिल्ला वार में दक्ष ये महिला कमांडो इस काम में दिनरात लगी हुई हैं।

राजनगर स्थित सशस्र सीमा बल (एसएसबी) की 18वीं बटालियन में 75 महिला कमांडो की पोस्टिंग भारत-नेपाल सीमा पर की गई है। महिला कमांडो को करीब नौ महीने की कड़ी ट्रेनिंग मिली है। उन्हें हथियार चलाने, नाका पेट्रोलिंग, सर्च ऑपरेशन, क्लोज कॉम्बैट ड्रिल, गुरिल्ला वार, जूडो-कराटे व ताइक्वांडो समेत अन्य कई विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया है। महिला कमांडो ने सशस्र सीमा बल की ताकत को दुगुना कर दिया है।

महिला तस्करों को पकड़ना हुआ आसान

कमांडेंट अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि बीते अप्रैल माह में सभी महिला कमांडो की पोस्टिंग प्रशिक्षण के बाद की गई है। इनका मुख्य कार्य सीमा की रखवाली करना, सीमा क्षेत्र से होने वाले सभी तरह के गैर कानूनी धंधे व तस्करी को रोकना है। खासकर महिला कमांडो की तैनाती से महिला तस्करों को पकड़ना आसान हो गया है। संदिग्ध महिलाओं की जांच करना सुलभ हो गया है।

महिला हैं तो क्या हम भी बंदूक चलाना जानती हैं..

सीमा सुरक्षा में तैनाती जैसे सवाल पर मुस्कुराते हुए बताती हैं कि महिला हैं तो क्या हुआ, हम महिलाएं भी बंदूक उठाना जानती हैं। देश के दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने की हिम्म्त हममें भी है। बस जरूरत है मौका मिलने की, हम भी किसी से कम नहीं। इतिहास गवाह है कि देश को बचाने की बात जब भी आई है तो नारी शक्ति ने भी अपना दम दिखाया है।

चुनौती का सामना कर हासिल किया मुकाम

महिला कमांडो राधिका मौर्या, सोनाली कुमारी, नेताली प्रसंथी, रश्मि कुमारी व अन्नू सुमंथी समेत कई महिला कमांडो ने बताया कि अभावों के बीच पलेी-बढ़ीं। फिर संघर्ष व चुनौतियों का सामना कर मुकाम हासिल की हूं।

 

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