डॉक्टरों की राय, ब्लैक फंगस जैसा घातक और जानलेवा नहीं है व्हाइट फंगस, लोगों को दी ये सलाह

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पटना: कोरोना और ब्लैक फंगस के बीच व्हाइट फंगस की चर्चा मेडिकल जगत में हो रही है। हालांकि विशेषज्ञ व्हाइट फंगस को ब्लैक फंगस जैसा घातक नहीं मान रहे हैं। 
पीएमसीएच के चर्म रोग विभाग के वरीय विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक झा ने कहा कि इंसान में व्हाइट फंगस एक चर्म रोग है, जिससे शरीर में उजला चक्ता जैसा बन जाता है और खुजली होती है। यह बीमारी जानलेवा नहीं होती है।

इससे डरने की भी कोई जरूरत नहीं है। एक अच्छे चर्म रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर इस बीमारी से मुक्त हुआ जा सकता है। उन्होंने कहा कि फंगस की बीमारी कोई नई नहीं है। स्किन के साथ कान में भी फंगस जमा हो जाता है। फंगस जनित बीमारियों में ब्लैक फंगस ही फिलहाल सबसे घातक नजर आ रहा है। भले ही यह बीमारी संक्रामक नहीं है लेकिन जानलेवा है।

वहीं, एम्स पटना के कोरोना के नोडल पदाधिकारी सह वरीय हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि पटना अथवा पूरे देश में अभी व्हाइट फंगस से फेफड़े में संक्रमण की सूचना अभी नहीं मिली है। व्हाइट फंगस 2008 में अमेरिका और कनाडा में चमगादड़ों में मिला था। 2018 में इन दोनों देशों में कुछ इंसानों में भी इस बीमारी की पुष्टि हुई थी। 

हालांकि उनकी जानकारी के मुताबिक देश के किसी अस्पताल में इस तरह के फंगस के शिकार कोई मरीज नहीं मिले हैं जिनके फेफड़े में घातक संक्रमण हुआ हो। कोरोना संक्रमण से पीड़ित कमजोर इम्युनिटी वाले डायबिटीज मरीज अथवा अंग प्रत्योरोपण करा चुके मरीज ही ब्लैक फंगस के शिकार पाए जा रहे हैं।

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