डॉक्टर की सलाह: लक्षण प्रकट होते ही तुरंत कराएं डेंगू की जांच

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बदलते मौसम में बुखार, खांसी और सर्दी के बीच डेंगू का प्रकोप काफी तेजी से बढ़ा है। डेंगू मुख्य रूप से बरसात के मौसम में तथा उसके तुरंत बाद के महीनों अर्थात जुलाई से अक्टूबर में सबसे अधिक होता है। ये बातें डेंगू के बढ़ते प्रकोप और बरती जाने वाली सावधानियों पर सीवान की प्रसिद्ध चिकित्सिका डॉ संगीता चौधरी का कहना है। डॉ संगीता आगे कहती हैं कि एक अनुमान के मुताबिक प्रतिवर्ष पूरे विश्व में लगभग दो करोड़ लोगों को डेंगू बुखार होता है। आम भाषा में इस बीमारी को हड्डी तोड़ बुखार कहा जाता है, क्योंकि इसके कारण शरीर व जोड़ों में बहुत दर्द होता है।

तेज बुखार के साथ शरीर और सिर दर्द प्रमुख लक्षण
इसके आम लक्षणों में  ठंड के साथ तेज बुखार, अत्यधिक शरीर दर्द तथा सिर दर्द प्रमुख है। डेंगू का वायरस एडीज मच्छर के द्वारा रक्त चूसने के दौरान शरीर में जाता है। जिस दिन डेंगू वायरस से संक्रमित कोई मच्छर किसी अन्य स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो उसके लगभग 3-5 दिनों के बाद डेंगू बुखार के लक्षण प्रकट होते हैं। यह संक्रमण काल तीन से 10 दिनों तक भी हो सकता है।

सही समय पर सही निदान है जरूरी
डेंगू बुखार की पहचान सबसे महत्वपूर्ण है। इसके लिए हमें एनएस 1 किट से टेस्ट या एलाइजा टेस्ट कराना होता है। डेंगू के किसी एक लक्षण दिखाई देने पर हमें तुरंत ही अपने नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए ताकि वहां आवश्यक परीक्षण करके रोग का सही निदान किया जा सके। इस बीमारी में स्वयं चिकित्सक बनने की कोशिश न करें। डेंगू बुखार को ठीक होने में 7 से 14 दिनों तक का समय लग सकता है।

डेंगू के कारण
– डेंगू के चार सीरो टाइप है। एक बार जब कोई व्यक्ति डेंगू बुखार से उबर जाता है, तो वह विशिष्ट वायरस से प्रतिरक्षित होता है, लेकिन अन्य तीन प्रकार के वायरस से नहीं।
– डेंगू के पहले स्टेज में व्यक्ति को बुखार, जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, हेडेक जैसे लक्षण होते हैं। फिर भी आपको चिकित्सक के पास जाने जरुरत है क्योंकि वे आपका एनएस 1 किट से जांच होगी।
– इसके अगले स्टेज में बुखार तो उतर जाएगा पर घर जाने के बाद आपको वार्निंग साइन के साथ दूसरे लक्षण जैसे पेट में दर्द,  उल्टी बहुत हो रही हो तब आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए। तब डॉक्टर आपके लिए कुछ हेमेटोक्रीट, अल्ट्रासाउंड जैसे कुछ टेस्ट लिखेगें जिससे यह पता चलेगा कि आपके पेट या फेफड़ों में कहीं पानी तो नही जमा हो रहा है। अगर यह लक्षण पाए जाते हैं तो इसका अर्थ है कि आपकी खून की धमनियां कहीं न कहीं से लीक हैं। यह शरीर के लिए वार्निंग साइन है।

बिना लैब के पता करें डेंगू
जहां लैब की व्यवस्था नहीं है वहां के चिकित्सक बीपी के ऊपर और नीचे का औसत लेकर बीपी कप को पांच मिनट तक हाथ में ही फुलाए रखें। बीपी कप खोलने पर अगर त्वचा नार्मल हो तो ठीक, अगर उसमें नीले चकत्ते आ रहे हैं तो कहीं न कहीं कैपिलरी लीकेज है। इसका स्पष्ट अर्थ है कि डेंगू के वायरस उस मरीज में है।

हर डेंगू मरीज को प्लेटलेट्स नहीं चढते
प्लेटलेट्स को लेकर लोगों के बीच एक प्रकार की भ्रांति है। प्लेटलेट्स अगर 10 हजार से कम है तभी उसे चढ़ाने की जरुरत होती है। ऐसा तभी होता है जब हेमेटोक्रीट की संख्या कम हो जाती है और खून पतली हो जाती है। इस बीमारी में लक्षण आधारित इलाज होता है। एस्पिरिन और आइबूप्रोफेन की गोली इसमें कभी भी नहीं लेनी चाहिए। बुखार को पेरासिटामोल से ही उतारना होता है।

पोस्ट डेंगू में भी रखें ख्याल
अधिकतर लोगों में डेंगू के पोस्ट प्रभाव भी देखे गए हैं जिसमें मरीज को कमजोरी, जोड़ों का दर्द और थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में संतुलित और पौष्टिक भोजन और नियमित दिनचर्या अपनाकर पोस्ट प्रभाव को भी दूर किया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति डेंगू से जुड़ी जानकारी फोन नंबर 8292563929 पर ले सकते हैं।

अन्य महत्वपूर्ण बात
– मच्छरों से बचाव के पर्याप्त इंतजाम करें। आसपास पानी का जमाव न होने दें। पूरे शरीर को ढकनेवाला कपड़ा पहने। सम्भव हो तो खिड़की और रौशनदान में महीन जाली लगा लें। एडीज मच्छर दिन में काटता है, लेकिन डेंगू वायरस से संक्रमित सामान्य मच्छर तो कभी भी काट सकता है। इसलिए डेंगू बुखार से ग्रस्त रोगी को बीमारी के शुरू के 6-7 दिनों तक मच्छरदानी से ढके हुए बिस्तर पर ही रखें।
– डेंगू बुखार के दौरान खुद को हाइड्रेट रखें।
– अनावश्यक दवाओं का सेवन न करें।
– विटामिन सी युक्त फल और पपीते का सेवन करें। पर्याप्त आराम और नींद से जल्द रिकवरी होती है। तले, भुने और जंक फूड से खुद को दूर रखें।

गर्भवती रखें डेंगू में खास ख्याल:
डेंगू में ऐसी महिलाएं जो प्रेग्नेंट हैं वह कोशिश करें कि उनको डेंगू न हो। इसके लिए वह दिन और रात मच्छरदानी लगाकर ही सोएं। डेंगू हो जाने पर बहुत सारी दिक्कतें आ सकती है जिससे गर्भपात, समय से पहले बच्चे का जन्म, कोरीयो एम्निओनिटिस,प्री टर्म लेबर पेन जैसी जटिलताएं आती है। इसके बावजूद यह सुखद है कि डेंगू का वायरस बच्चे को किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंचाता है। वहीं स्तनपान कराने वाली महिलाएं अपने बच्चे को डेंगू बुखार में भी दूध पिता सकती हैं।

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