बिहार के राजभवन पर नहीं लगेगा ताला, राज्यपाल बोले- व्यवस्था बिगड़ी तो मैं मूकदर्शक नहीं रहूंगा

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पटना: बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा कि राजभवन के दरवाजे पर ताला नहीं लगा होना चाहिए, बेशक पहरेदार रहें। लोकतंत्र में जो भी जिस पद पर है, जनता का यह अधिकार है कि वह अपनी बात उससे मिलकर कह सके। इसलिए मैं सबसे नियमित मिलता हूं। आगे भी यह क्रम जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कोई व्यवस्था बिगाड़ेगी तो मैं मूकदर्शक नहीं बना रह सकता।

अगले रविवार को बिहार के राज्यपाल के रूप में अपना एक माह पूरा करने वाले लालजी टंडन ने कहा कि पहली बार विश्व को शिक्षा पद्धति, लोकतंत्र, नैतिकता और राष्ट्रभक्ति की समझ देने वाले बिहार में आकर हर व्यक्ति को गौरव बोध और आनंद प्राप्त होता है। बिहार जिसके लिए जाना जाता है, उस समृद्ध इतिहास के साक्ष्य आज भी खंडहर रूप में मौजूद हैं। यहां दुनियाभर से लोग नालंदा और विक्रमशिला जैसी संस्थाओं में शिक्षा लेने आते थे। आचार्य कौटिल्य जैसे शिक्षक थे। आश्चर्य होता है कि जहां ऐसी समृद्ध शिक्षा पद्धति थी, वहां शिक्षा का क्या स्तर रह गया है। बहुत सुधार की आवश्यकता है। शिक्षा की गुणवत्ता ठीक नहीं होगी तो नई पीढ़ी के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा।

लालजी टंडन ने कहा कि आज केन्द्र और राज्य, दोनों सरकारों का फोकस शिक्षा पर है। ऐसा पहली बार हुआ है। इतने संसाधन कभी नहीं रहे। और जो भी ढांचागत जरूरतें हैं, वह पूरी की जाएंगी। सरकार का काम संसाधन पूरा करना है। विद्यार्थियों में रुचि विकसित करना और शैक्षिक अनुशासन लाने का काम कुलपति करें।

स्नातक नामांकन में बड़ी संख्या में आईं गड़बड़ियों की शिकायतों पर उन्होनें कहा कि पारदर्शिता और पात्रता इसकी जरूरत है। प्रतिभा को दरकिनार करने का अधिकार किसी को नहीं है। नई व्यवस्था लागू हो और लागू करने वाले ही असंतुष्ट हों तो यह ठीक नहीं। लगातार जांच हो रही है, फीडबैक आ रहे हैं। जो कठिनाई आई है, उसका समाधान होगा। बीएड इंट्रेंस टेस्ट की खामियां भी दूर की जाएंगी। जो नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार हैं, उनकी पहचान कर कार्रवाई होगी। कमेटी गठित कर दी गयी है।

राज्यपाल ने कहा-अभी मैं कुलाधिपति नहीं, शिक्षक के रूप में बिहार की उच्च शिक्षा की जानकारी ले रहा हूं। इसके बाद चांसलर पद की जिम्मेदारियों का निर्वहन करूंगा। तब मेरी भूमिका सामने आएगी। 27 सितंबर को कुलपतियों की बैठक के बाद अपना निर्देश दूंगा। लालजी टंडन ने कहा कि वे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता में कोई दखल नहीं देना चाहते, लेकिन कुलाधिपति के रूप में विश्वविद्यालय ठीक से चलें, यह जिम्मेदारी और अधिकार दोनों मेरे पास हैं। मानता हूं कि कुलपति का पद सम्मानीय होता है, तो उनसे अपेक्षा भी की जाती है। वे जिस कुल के कुलपति हैं उनको शिक्षा-संस्कार देने की जिम्मेदारी उनकी है। नयी पीढ़ी का भविष्य सुधारना उनका दायित्व है। पूर्ण स्वतंत्रता देने के बाद भी व्यवस्था नहीं सुधरती है तो जवाबदेह भी वही होंगे। यह बहुत दुखद होगा, यदि किसी कुलपति पर मुझे कार्रवाई करनी पड़े। कुलपतियों को अपने दायित्व पर खरा उतरना ही होगा अन्यथा इस पद के सम्मान की रक्षा करनी होगी।

Source: Live Bihar

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