PA of DM

जिस DM के PA को मिलता था महीने का 16 हजार, पर करोड़ों की संपत्ति बना ली

कही-सुनी

यहां के DM के PA और स्टेनो प्रेम कुमार नौकरी में आने के केवल 11 साल के अंदर ही करोड़ों रुपए के मालिक बन गए। जब आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने उसके क्वार्टर पर छापेमारी की तो उसके काले कारनामे खुलकर सामने आने लगे।

उसके क्वार्टर से मिले डॉक्युमेंट और व्हीकल से लेकर अन्य संपत्ति 20 करोड़ से कम नहीं होगी। कोलकाता में भी उसका एक फ्लैट होने की बात कही जा रही है। हैरत यह है कि सरकार की संपत्ति विवरणी भी झूठी दी गई।

प्रेम कुमार मूल रूप से नालंदा के कन्हैयागंज के नवगढ़ गांव का रहनेवाला है। पिता हरिमोहन शुक्ला हैं। 13 दिसंबर 2006 में समाहरणालय संवर्ग के स्टेनो के पद पर बहाली हुई। उस वक्त इनकी पगार केवल आठ हजार रुपए थी। पहली नियुक्ति कहलगांव के एसडीओ कार्यालय में हुई। इसके बाद जिला लेखा में वहां से आए।




इसके साथ ही 2010 में इनकी प्रतिनियुक्ति DM कार्यालय के गोपनीय शाखा में हुई। उस वक्त 16 हजार का तनख्वाह मिलती था। फिर वहां काम करते-करते सात साल बीत गए।

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अभी केवल 40 हजार रुपए मिलते हैं, लेकिन इसी बीच वर्ष 2014 में डीएम वीरेंद्र प्रसाद यादव आए। जिनके समय में भू-अर्जन और विकास शाखा की योजनाओं की राशि बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन बैंक के सरकारी खाते से राशि सृजन के खाते में चली गई।

जानकारी के मुताबिक तत्कालीन डीएम वीरेंद्र प्रसाद यादव के समय किरानी प्रेम कुमार खास बन गए। इसके साथ सृजन में आने-जाने का सिलसिला शुरू हुआ। रोज सुबह और शाम को प्रेम माथा टेकने के लिए सृजन आते और फिर काले कारनामे का जाल बुनते थे।




स्टेनो प्रेम कुमार अपने दफ्तर में लोगों से DM से कम रसूख नहीं रखता था। अगर कोई डीएम से मिलने की इच्छा जाहिर करता था तो बिना प्रेम की इच्छा के यह संभव नहीं था।

वहीं अगर राजनीतिक दलों के नेता आ गए और उनसे लाभ हो सकता है तो उसे बिठाकर खातिरदारी में जुट जाता था। इतना ही नहीं, कुछ नेताओं को प्रलोभन भी देता था। जमीन से जुड़े मामलों को लेकर कुछ नेताओं को प्रोत्साहित करता था कि डीएम के कोर्ट में जमीन विवाद के कई मामले आए हैं।




वह आश्वस्त भी करता था कि किसी भी तरह कोई दिक्कत प्रशासन की ओर से नहीं आने देंगे। डीएम के पीए और स्टेनो प्रेम कुमार के व्यवहार व कारमाने को लेकर को विधायक से लेकर अंचलकर्मियों ने शिकायत भी थी। हालांकि आला अफसर ने कभी भी उस पर कार्रवाई नहीं की और मामला दबा दिया गया।

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जदयू के नाथनगर विधायक अजय मंडल ने मुख्यमंत्री से एक बार प्रेम कुमार की शिकायत की थी, जिसमें कहा गया था कि जब डीएम से मिलने के लिए जाते हैं तो प्रेम सही व्यवहार नहीं करता है। इसको लेकर अफसर ने जब प्रेम को डांट-फटकार लगाई तो उसने विधायक से माफी मांगी और इसके बाद मामला शांत हुआ।

हाल में ही जब पूर्व एसडीओ कुमार अनुज का मामला सामने आया तो इसमें भी एक अंचल कर्मी ने डीएम से लिखित रूप से शिकायत की थी कि स्टेनो प्रेम प्रताड़ित करता है और मोटी रकम की मांग करता है।इसको लेकर भी डीएम के समझाने के मामला शांत हो गया। खुद के साथ सगे-संबंधियों को भी संपत्ति अर्जित कराने में जुटा रहा




स्टेनो प्रेम कुमार करीब पांच साल से मुश्किल से सृजन महिला विकास सहयोग समिति से जुड़ा। इसके बाद भी उसके काली कमाई का रास्ता खुला। यहां से कमाई का सिलसिला तब तक जारी रहा जब तक समिति की सचिव मनोरमा देवी रही। उनके निधन के बाद रास्ता बंद होने लगा।

हालांकि कुछ दिनों के बाद दोबारा वहां आने-जाने का सिलसिला शुरू हो गया। इस दौरान जानकारी के मुताबिक सबौर के पास एक बड़ा जमीन का प्लॉट खरीदा। तिलकामांझी के शीला विवाह भवन के पास भी जमीन होने की बात कही जा रही है। साथ ही जीरो माइल के पास एक अपार्टमेंट में फ्लैट खरीदा गया है, ऐसी बात भी सामने आ रही है।




प्रेम कुमार ने जमीन के धंधे में करोड़ों रुपए कमाए। साथ ही तिलकामांझी के लालबाग स्थित अपने एक रिश्तेदार जो सीआई हैं, उन्हें भी काली कमाई का मंत्र सिखाया और फिर उन्होंने भी खूब रुपए कमाए। हालांकि यह सब अभी जांच का विषय है।

नकद – 1000
बाइक-चारपहिया वाहन नहीं (पत्नी के नाम हीरो होंडा और स्कूटी)
जेवरात -30 ग्राम (पत्नी को 100 ग्राम, दो बच्चों के नाम 90 ग्राम सोना)
संपत्ति – एक फ्रीज, एक एलईडी टीवी और एक वाशिंग मशीन।




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