दिल्ली में बिहारी छात्रों को बनाया जा रहा है निशाना, गलत आरोप लगाकर किया जा रहा है परेशान

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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विगत कई दिनों से बिहारी छात्रों को परेशान किया जा रहा है। इसी बीच कल रात जो कुछ हुआ वह काफी भयावह है। युवा साहित्यकार निलोत्पल मृनाल पर ना सिर्फ गलत आरोप लगाया गया बल्कि उन्हें थाने ले जाकर टार्चर भी किया गया है। इसी बीच मृनाल ने फेसबुक पर लिखा है कि-प्लीज़ ध्यान दें। छात्र कहाँ जाएँ? नेहरू विहार से सुचना है कि, अभी अभी कुछ 100, 200 की संख्या में समूह बना कर स्थानीय गुंडे ( न कि सामान्य नागरिक) जहां भी छात्रों को देख रहे हैं, पीट दे रहे हैं

माहौल अराजक है। मुझ जैसे कई साथी को वहां से कहा जा रहा साथियों द्वारा कि, अभी मत आईये, ये मार रहे हैं। कल रात से नक्सल का घटिया अफ़वाह फैला अब अभी स्थानीय गुंडों को आक्रामक कर तैयार कर दिया गया है। पुलिस फोर्स भर दिया गया है और वे भी लाठी चला रहे। पुलिस खुले आम ये सब कर रही और सह दे रही उन मार पीट करते गुंडों को। हम छात्र आज शांति से कैंडिल मार्च को आने वाले थे, लेकिन ऐन मौके पर फसाद शुरू कर दिया गया है। अब छात्रों की सुरक्षा बेहद चिंताजनक है। कोई भी मीडिया नही पहुंचा अभी वहां। कुछ लोग छात्रों के विरुद्ध गलत रिपोर्टिंग कर रहे। मुझे सुबह से अफवाहों से इतना हड़काया कि हिम्मत न कर पाऊँ छात्रों के साथ किसी समाधान की योजना पे

आप सबसे हाथ जोड़ के विनती है कि मीडिया को वहां के हालात जानने भेंजे। हमारे कोचिंग संस्थान तुरंत छात्रहित में पुलिस की कार्यवाही और स्थानीय गुंडागर्दी के विरुद्ध एकजुट हो ये दवाब बनायें कि छात्र छात्राओं की सुरक्षा से समझौता न हो। आखिर हम छात्र कहाँ जाएँ? क्या दुनिया का कौन सा हिस्सा मांग लिया है इन मार खाते छात्रों ने? किसका हक़ खा गए हमलोग? प्लीज़ बहुत संकट में बड़े डरे हुए हैं ये दूर दूर के प्रदेश से छात्र। कुछ करिये, प्लीज़। जय हो।

बताते चले कि नेहरू विहार और मुखर्जीनगर में आये दिन होने वाली छेड़छाड़, हिंसात्मक मारपीट, गाँली गलौंच से तंग आकर अपनी पढ़ाई को छोड़कर मजबूरन आज छात्र को सड़क पर उतरना पड़ा, इस उम्मीद से कि पुलिस की सहायता से, बातचीत से इस समस्या का कोई हल निकाला जा सकेगा। परन्तु पुलिस ने अपने चरित्र के अनुसार चरित्रहीन वर्ताव किया और कर दिया लाठी चार्ज और उठा ले गई पॉच-छः दोस्तों को। इन दस वाई दस के मकानों में, बिना सूरज की रोशनी और दिल्ली की प्रदूषित हवा में रहने का कोई सौक नहीं है साहब, और ऊपर से आप बर्बरता दिखायेगें हम पर। यहॉ रहने वाला छात्र समझदार है परन्तु इसकालयह अर्थ निकाला जाये कि वो कायर है, वह अपनी आवाज नहीं ऊठा पायेगा तो भूल में है आप। हम करोंड़ों की आवाज ऊठा सकते हैं तो अपनी भी उठा ही लेंगे

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