सीवान से नेपाल बॉर्डर तक बनेगी फोरलेन सड़क, अयोध्या से जनकपुर की घट जाएगी दूरी 

कही-सुनी

पटना: राज्य में एक और फोर लेन हाईवे बनेगा। केंद्र सरकार ने 200 किमी लंबे इस हाईवे पर 4000 करोड़ रुपए खर्च करना तय किया है। उत्तर बिहार के जिलों सीवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, शिवहर और सीतामढ़ी के पिछड़े इलाकों को इससे नई पहचान मिलेगी। विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। उत्तर प्रदेश से नेपाल जाने के लिए भी नया हाईवे तैयार हो जाएगा।

पथ निर्माण विभाग के सहयोग से केंद्र द्वारा 200 किमी इस नए एलाइनमेंट को मंजूरी दे दी गई है। अयोध्या से जनकपुर की दूरी 8 से 10 घंटे में तय कराने वाले इस हाईवे को केंद्र सरकार ने रामजानकी मार्ग नाम दिया है। केंद्र की इस महत्वपूर्ण परियोजना का एलाइनमेंट तय होने के बाद अब डीपीआर बनाया जाएगा। इसके बाद उत्तर बिहार के विकास को नया आयाम देने वाले इस महत्वपूर्ण हाईवे का जमीन पर निर्माण शुरू होगा।3 एसएच, एक एनएच और कई सड़कें इस हाईवे में शामिल रामजानकी मार्ग के बिहार हिस्से में यह महत्वपूर्ण हाईवे सीवान जिले में प्रवेश होगा।

उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर बिहार में मैरवा से सीवान मुख्यालय (एसएच-53) की दूरी 24 किमी है। यह हिस्सा ठीक है और दो लेन चौड़ा है। वहीं सीवान शहर के अफराद मोड़ से मशरख तक (एसएच-73) की 50 किमी की दूरी भी फिलहाल 2 लेन है। वहीं मशरख से राजापट्‌टी (एसएच-90) की दूरी 10 किमी है। राजापट्‌टी से निर्माणाधीन सत्तर घाट सेतु होते हुए विश्व के सबसे बड़े बौद्ध स्तूप के लिए चर्चित केसरिया की दूरी 30 किमी है, इस सड़क की भी वर्तमान स्थिति ठीक नहीं है। यह सड़क कहीं सिंगल लेन है तो कहीं इंटरमीडिएट लेन।

गंडक दियारा का भी होगा विकास गंडक नदी के दियारा के बड़े इलाके में रामजानकी मार्ग बन जाने से काफी पिछड़े इस इलाके की भौगोलिक तस्वीर बदल जाएगी। गंडक के पार पूर्वी चंपारण जिले में केसरिया से चकिया की दूरी 17 किमी है। इस सड़क की भी स्थिति सामान्य है। वहीं चकिया से मधुबन, शिवहर होते हुए सीतामढ़ी, सुरसंड के समीप नेपाल बॉर्डर की दूरी 75 किमी है। तीर्थयात्री यहीं से नेपाल स्थित जनकपुर सीता की जन्मस्थली का दर्शन करने जाते है। पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव ने बताया कि हमने समीक्षा की है। केंद्रीय एजेंसी ने मार्च, 2018 तक टेंडर प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया है। पीएम पैकेज के तहत बन रहे रामजानकी मार्ग के बनने से धार्मिक पर्यटकों को तो लाभ होगा। साथ ही संबंधित क्षेत्र के विकास का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

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