सोचिये कि पुरुष क्रिकेट का वर्ल्ड कप चल रहा है और आपको बोल दिया जाए कि चुपचाप अपना काम कीजिए, मैच मत देखिए। इस बात पर शायद आप झगड़ा कर देंगे या गुस्सा हो जाएंगे! मुल्क की बेटियां अभी क्रिकेट वर्ल्ड कप खेल रही हैं, चार मैच लगातार जीत चुकी हैं और उनमें पाकिस्तान से भी हम जीत चुके हैं। लेकिन आज कोई पटाखे नहीं फोड़ता है? न ही किसी को कोई खास रुचि रहती है।
दीप्ती शर्मा ने महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप में श्रीलंका के खिलाफ खेली 78 रनों की पारी।

ये दीप्ति हैं, क्रिकेट खेलती हैं देश की तरफ से। कदमों का इस्तेमाल कर छक्के भी मारती है और इन्होंने बहुत कम मैचों में कई रिकॉर्ड भी बना लिए हैं। एक पारी में 188 रन का रिकॉर्ड इन्हीं के नाम है, किसी भी भारतीय महिला क्रिकेटर द्वारा यह सबसे बड़ा स्कोर है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दूसरी सबसे बड़ी पारी है। दीप्ति पूनम राउत के साथ 300 रन की साझेदारी कर चुकी हैं। यह महिला क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी साझेदारी है। सहारनपुर से निकली यह बेटी इतिहास बना रही है, बीती 5 तारीख को लंका फतह में भी दीप्ती 78 रनों की पारी खेली।

दीप्ती हमें नाज़ है तुम पर, तुम मुल्क की बेटी हो। यह मुल्क तुम जैसे लोगों के बारे में जान नहीं पाता। सब धन के अतिरेक में फंसे हैं, इसलिए उन्हें बाज़ार जो समझाता है, जो परोसता है वह उसी को पसंद करते हैं।

अब देखो ना… तुम सब वर्ल्ड कप खेल रही हो, यहां भी खेल क्रिकेट ही है, बोर्ड भी वही है, आयोजक भी वही है, मुल्क भी वही है, जर्सी का रंग भी वही है, डिज़ाइन भी वही है लेकिन नज़रिया बदला हुआ है। क्यों इसमें बाज़ार नज़र नहीं आ रहा है क्या? या सबने अपने नज़रिए को तिलांजलि दे दी है?

खैर छोड़िए ये सब। अपने दिमाग से देखना-सोचना शुरू कीजिए, टीवी-अखबार की नज़र से नहीं। इस वर्ल्ड कप को भी तवज्जो दीजिए, इसका भी आनंद लीजिए। मुल्क की हर दीप्ति पर हमें नाज़ है… खूब खेलो और जीतो। बेटियों का हौसला बढ़ाइए। क्योंकि जैसे – “माही मार रहा है” आपने सिनेमाघरों में सुना था… हो सकता है एक दिन सिनेमाघरों में यह भी सुनने को मिले कि “दीप्ति मार रही है…”

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