दिनकर जयंती पर महागठबंधन का सिंहासन हिलाने पूर्णिया में बीजेपी की रैली करेंगे अमित शाह

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बिहार में सत्ता से हटने के बाद बीजेपी महागठबंधन सरकार पर लगातार हमलावर है। अब सितंबर से बीजेपी के बड़े नेताओं के बिहार दौरे का सिलसिला शुरू होने वाला है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सितंबर में दो दिवसीय प्रवास पर रहेंगे। 23 सितंबर को उनकी पूर्णिया में विशाल जनसभा होगी, जिसमें वे नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार के खिलाफ गरजेंगे। यह महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का भी गढ़ है। खास बात ये है कि 23 सितंबर को ही राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती है। ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ दिनकर की प्रसिद्ध कविता है। दिनकर की जयंती पर महागठबंधन सरकार का सिंहासन हिलाने के लिए अमित शाह पूर्णिया में जनसभा करेंगे।

जानकारी के मुताबिक अमित शाह का सितंबर में दो दिवसीय बिहार दौरा फाइनल हुआ है। शाह का यह दौरा मुस्लिम बाहुल्य सीमांचल क्षेत्र में होने वाला है। गृह मंत्री 23 सितंबर को पूर्णिया में बीजेपी की बड़ी रैली करेंगे। इसके अलावा 24 सितंबर को वे किशनगंज में बीजेपी कार्यकर्ताओं को भी संबोधित करेंगे। बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद शाह का राज्य में ये पहला दौरा है। आरजेडी और एआईएमआईएम के गढ़ सीमांचल में बीजेपी को मजबूत करने के लिए अमित शाह का प्रवास अहम माना जा रहा है।

महागठबंधन सरकार के खिलाफ बीजेपी की रणनीति

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एनडीए से नाता तोड़कर महागठबंधन के साथ जाने के बाद से ही बीजेपी एग्रेसिव मोड में आ गई। नई सरकार के गठन के तुरंत बाद बीजेपी नेताओं ने कैबिनेट में शामिल मंत्रियों की आपराधिक छवि को मुद्दा बनाया। इसके बाद पटना में शिक्षक अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज के साथ कानून व्यवस्था को लेकर बीजेपी हमलावर नजर आई। प्रदेश बीजेपी के नेता महागठबंधन के सत्ता में आने को बिहार में जंगलराज की वापसी करार दे रहे हैं।

आगामी चुनाव की तैयारियां

बीजेपी ने आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव को लेकर बिहार में अपनी रणनीति तैयार कर ली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का सीमांचल दौरा इसी रणनीति का हिस्सा है। उनके बाद बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई केंद्रीय नेता राज्य का दौरा करेंगे। पार्टी ने मोदी सरकार की उपलब्धियों को गिनाकर और महागठबंधन सरकार के खिलाफ माहौल बनाकर राज्य में फतेह करने का लक्ष्य रखा है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की दो विधानसभा सीटों मोकामा और गोपालगंज सदर पर उपचुनाव भी होना है।

दिनकर का है बिहार से गहरा वास्ता

खबर में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का जिक्र है। इसलिए आपको बता दें कि दिनकर का बिहार से गहरा वास्ता है। उनका जन्म बेगूसराय जिले के सिमरिया घाट में 23 सितम्बर 1908 को हुआ था। उनका बचपन गांव में ही गुजरा। उच्च शिक्षा के लिए वे पटना आ गए। फिर अध्यापक की नौकरी की। उन्होंने कई बेहतरीन कविताएं लिखीं, जो आज भी प्रासंगिक हैं।

दिनकर ने 1934 से 1947 तक बिहार सरकार की सेवा में सब-रजिस्ट्रार और प्रचार विभाग के उपनिदेशक के रूप में काम किया। आजादी केबाद वे मुजफ्फरपुर कॉलेज में हिंदी विभाग के अध्यक्ष बने। फिर भागलपुर विश्वविद्यालय में कुलपति का कार्यभार संभाला।

 

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