महाशिवरात्रि पर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में महत्वपूर्ण बाबा बैैद्यनाथधाम पर जलार्पण के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा. अहले सुबह से ही श्रद्धालु कतारबद्ध थे. क्यू कांप्लेक्स से होकर श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश कराया गया. सुबह से लेकर रात आठ बजे तक करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने जलार्पण किया. इसमें आठ हजार से अधिक भक्तों ने शीघ्र दर्शनम पास से पूजा की. इसे लेकर प्रशासन की ओर से व्यापक व्यवस्था की गयी थी. रूट लाइन में भी शिवधुन बज रही थी.  

शुक्रवार को मंदिर का पट सुबह तीन बजे खुला. सरकारी पूजा सरदार पंडा गुलाब नंद ओझा ने की. इसके बाद सुबह साढ़े पांच बजे राजू भंडारी रोहिणी इस्टेट से आयी मोउर मुकुट को बाबा पर चढ़ाया. सरकारी पूजा के बाद आम भक्तों के लिए पट खोल दिया गया. भक्तों की कतार मंदिर परिसर से बाहर निकल कर विलियम्स टाउन स्थित बीएड कॉलेज तक पहुंच गयी. भक्तों की सुविधा के लिए पुलिस बल लगी रही.  

इससे पूर्व महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या पर ही भक्त मंदिर परिसर पहुंच रहे थे. भक्तों की कतार देर रात्रि से मानसरोवर से लगनी शुरू हो गयी थी. सुबह होते ही कतार विलियम्स टाउन बीएड कॉलेज परिसर चली गयी. सरदार पंडा गुलाब नंद ओझा ने दो बार पूजा की. सुबह में सरकारी पूजा की. इसके बाद पुन: रात्रि 10 बजे चतुष्प्रहर पूजा की.   

आठ हजार से अधिक भक्तों ने की शीघ्र दर्शनम पास से पूजा : महाशिवरात्रि पर शीघ्र दर्शनम पास ने रिकार्ड तोड़ दिया. आठ हजार 647 भक्तों ने 500 रुपये शुल्क देकर शीघ्र दर्शनम पास से पूजा की. इससे मंदिर की आय में वृद्धि हुई.    चार्टर्ड प्लेन से बाबा पर हुई परिक्रमा : श्रद्धालुओं को एक नयी अनुभूति प्रदान करने की दिशा में शिवरात्रि महोत्सव समिति की ओर चार्टर्ड प्लेन से मंदिर प्रांगण में पुष्प की वर्षा श्रद्धालुओं व बाबा मंदिर पर की गयी. जमशेदपुर से उड़ान भर कर विमान दिन के लगभग 11 बजे आया. उसने बाबा-पार्वती मंदिर की पांच बार परिक्रमा की.  

निकाली गयी भव्य शिव बारात    इस अवसर पर देवघर में शाम सात बजे भव्य व आकर्षक शिव बारात निकली. बारात में भगवान शिव के साथ 40 देवी-देवता व भूत-पिशाच, बैंड बाजा, घोड़ा शामिल थे. बारात का मुख्य आकर्षण स्वच्छता का संदेश दे रहे कचरा-कच्च दैत्य था. ज्ञात हो कि पहली बार देवघर में प्रथम मेयर राजनारायण खवाड़े के मार्गदर्शन में शिव बारात 1994 में निकाली गयी थी. इसके बाद से शिव बारात की भव्यवता और प्रसिद्धि बढ़ती चली गयी. इसमें समिति के उपाध्यक्ष सह कलाकार मार्कण्डेय जजवाड़े की अहम भूमिका होती है.  

खूब हुए गठबंधन
बाबा की शादी पर बड़ी संख्या में भक्तों ने बाबा-पार्वती का गठबंधन किया. इसमें 800 से अधिक भक्तों ने गठबंधन अनुष्ठान किया. बाबा की शादी पर भक्तों ने सर्वाधिक मोर मुकुट चढ़ाया. इसमें एक हजार से अधिक भक्तों ने बाबा मंदिर के शिखर पर मोर मुकुट चढ़ाया.

Sources:-Prabhat Khabar

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