अभी तक फंसे हैं 1.21 करोड़ लोग बाढ़ में, 200 से ज्यादा की मौत

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उत्तर बिहार में बाढ़ की विभीषिका जारी है। समस्तीपुर के एक प्रखंड को बाढ़ ने अपनी चपेट में ले लिया। बाढ़ का दायरा 18 जिलों तक फैल चुका है, फिलहाल राज्य की 1.21 करोड़ आबादी इसकी जद में है।

पिछले 24 घंटे में 49 और लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। मौत का आंकड़ा बढ़कर 202 हो चुका है। भागलपुर में कोसी-सीमांचल के जिलों में नदियों का जलस्तर कम होने लगा है। वहीं भागलपुर और नवगछिया में गंगा खतरे के निशान को पार गई है।

शनिवार को गंगा का जलस्तर 32.90 सेमी दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से सेंटीमीटर अधिक रहा। कई नए इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है। शनिवार को भी मुजफ्फरपुर में बूढ़ी गंडक नदी विकराल बनी रही। बूढ़ी गंडक नदी लाल निशान से 55 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। रात 9 बजे सिकंदरपुर स्लुइस गेट से शहर में पानी आने लगा है।

इससे नदी के किनारे व शहर के बाहरी इलाके साथ-साथ मोतीपुर, मीनापुर, कांटी, मुशहरी व बोचहां प्रखंडों में दहशत है। शनिवार शाम छह बजे तक बूढ़ी गंडक का जलस्तर 53.08 मीटर पर पहुंच गया। डीएम धर्मेंद्र सिंह जल संसाधन विभाग के अभियंताओं के साथ तटबंधों की खुद निगरानी कर रह रहे हैं।




कांटी प्रखंड के पहाड़चक में 46.2 किलोमीटर पर दायां तटबंध में रिसाव शुरू हो गया। इस रिसाव को बंद कर दिया गया।
लेकिन, अभी खतरा बना हुआ है। दायां तटबंध पर शहर के आगे, रघई पुल व बजरमुरिया में हो रहे कटाव को देखते हुए बचाव कार्य जारी है। मोतीपुर के डुमरिया व शहर के सिकंदरपुर में कटाव का खतरा बना हुआ है।

जल संसाधन विभाग ने रविवार की सुबह तक जलस्तर में 42 सेंटीमीटर और वृद्धि की संभावना जताई है। मंडल में पहले से ही पांच रेलखंड के बंद होने के बाद शनिवार को दोपहर करीब एक बजे के बाद से समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड भी बंद हो गया।




इस दौरान समस्तीपुर जंक्शन पर दरभंगा, जयनगर, सीतामढ़ी व रक्सौल जाने वाली सवारी गाड़ियां लगी रही।
सीनियर डीसीएम ने बताया कि हायाघाट स्टेशन पर पानी लगने के कारण समस्तीपुर से दरभंगा का संपर्क टूट गया है। तत्काल प्रभाव से ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया गया है।

पहले से ही पांच रेलखंड के बंद होने के बाद शनिवार को दिन के करीब एक बजे के बाद से समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड भी बंद हो गया। इस दौरान जंक्शन पर दरभंगा, जयनगर, सीतामढ़ी रक्सौल जाने वाली सवारी गाड़ियां लगी रही, जबकि दरभंगा की ओर मुक्तापुर, हायाघाट, रामभद्रपुर किशनपुर तक के यात्री बूढ़ी गंडक स्थित रेल पुल के सहारे पैदल ही निकल गए।




सीनियर डीसीएम बिरेन्द्र कुमार ने बताया कि हायाघाट स्टेशन पर पानी लगने के कारण समस्तीपुर से दरभंगा का संपर्क टूट गया है। तत्काल प्रभाव से गाड़ियों का परिचालन बंद कर दिया गया है। कोसी-सीमांचल के जिलों में नदियों का जलस्तर कम होने लगा है। वहीं भागलपुर में गंगा शनिवार को खतरे के निशान को पार कर गई।

लेकिन जैसे-जैसे बाढ़ का पानी कम हो रहा है वैसे-वैसे तबाही का मंजर दिखने लगा है। पूर्वोत्तर राज्यों से अभी भी रेल संपर्क टूटा हुआ है। गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी के बाद नवगछिया में गंगा खतरे के निशान को पार गई है।




शनिवार को गंगा का जलस्तर 32.90 सेमी दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से सेंटीमीटर अधिक रहा। जलस्तर बढ़ने से कई नए इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है। गांववाले अपना-अपना घर-बार छोड़कर ऊंचे स्थानों पर पलायन करने लगे हैं। कार्यपालक अभियंता वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि कोसी का पानी घटा रहा मगर गंगा का बढ़ रहा है।

मुजफ्फरपुर में शहर के बाहर एनएच-77 पर बाढ़पीड़ितों ने शरण ले रखी है। शहर में यही एक ऊंची जगह है, जहां जान बचने की उम्मीद है। आस-पास के जिलों से आए बाढ़पीड़ितों के अलावा शहर के विभिन्न मुहल्लों के लोगों ने भी पोर लेन पर अस्थायी बसेरा बना रखा है।




सड़क ही इनका राहत शिविर है। इन लोगों को राहत की दरकार है। ऐसे में नजरें आसमान की ओर टिकी रहती हैं।
बाढ़ का दायरा 18 जिलों तक फैल चुका है, फिलहाल राज्य की 1.21 करोड़ आबादी इसकी जद में है। 164 प्रखंडों के 1842 पंचायतों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है।

पिछले 24 घंटे में 49 और लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। मौत का आंकड़ा बढ़कर 202 हो चुका है। बाढ़ से घिरे पूर्वी और पश्चिम चंपारण के कई इलाकों में लोगों को हेलिकॉप्टर के जरिए राहत सामग्री गिराई जा रही है।




पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, पूर्णिया, अररिया तथा किशनगंज में एयर ड्रापिंग करायी गई। प्रधान सचिवों की टीम ने पूर्णिया प्रमंडल के तीन जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया।

































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