देश के तमाम हिस्‍सों में कैसे मनाई जाती है बसंत पंचमी?

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बसंत पंचमी का पर्व आने वाला है. माना जाता है कि इस दिन माता सरस्‍वती प्रकट हुई थीं. बसंत पंचमी के दिन ही माता सरस्‍वती की विशेष पूजा की जाती है. स्‍टूडेंट्स और संगीत प्रेमियों के लिए ये दिन काफी खास होता है. इस बार बसंत पंचमी 26 जनवरी के दिन पड़ रही है. यानी इस बार देश का राष्‍ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस और मां सरस्‍वती की आराधना का पर्व एक ही दिन मनाया जाएगा. आइए आपको बताते हैं कि देश के तमाम हिस्‍सों में बसंत पंचमी का पर्व कैसे मनाया जाता है.

उत्‍तर प्रदेश और राजस्‍थान

उत्‍तर प्रदेश और राजस्‍थान जैसे राज्‍यों में बसंत पंचमी का त्‍योहार काफी धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन लोग सुबह स्‍नान आदि के बाद पीले वस्‍त्र पहनते हैं. माता सरस्‍वती की विशेष आराधना की जाती है. उन्‍हें पीली चीजें जैसे पुष्‍प, पीले मीठे चावल का भोग, पीले वस्‍त्र आदि अर्पित किए जाते हैं. हवन आदि होता है और बच्‍चे कॉपी-किताबों की पूजा करते हैं व संगीत प्रेमी अपने वाद्य यंत्रों की पूजा करते हैं. पूजा के बाद प्रसाद बांटा जाता है और पतंगबाजी की जाती है.

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में बसंत पंचमी के दिन माता सरस्‍वती की पूजा के लिए बड़ा सा पंडाल लगाया जाता है. बड़ी संख्‍या में लोग आकर माता सरस्‍वती की पूजा करते हैं और उन्‍हें पलाश के फूल, पीले चावल और बूंदी के लड्डू अर्पित करते हैं. इस दिन बंगाल में हाथेखोड़ी समारोह का आयोजन किया जाता है. हाथेखोड़ी समारोह में छोटे बच्‍चों को पहली बार चॉक या पेंसिल पकड़ाकर लिखना सिखाया जाता है.

बिहार 

बिहार में भी इस दिन सरस्‍वती माता की विशेष पूजा की जाती है. इस दिन लोग पीले वस्‍त्र पहनते हैं. माता सरस्‍वती को मालपुआ और सादी बेसन की पकौड़ी का भोग लगाते हैं. कई घरों में खिचड़ी बनाकर खाई जाती है. छात्र इस दिन कॉपी-किताबों की पूजा करते हैं.

उत्‍तराखंड

उत्तराखंड में बसंत पंचमी के दिन लोग फूल, पत्ते और पलाश की लकड़ी चढ़ाकर देवी सरस्वती की पूजा करते हैं. कई भक्त भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा भी करते हैं. इस दिन यहां भी लोग पीले वस्त्र पहनते हैं या पीले रुमाल का इस्तेमाल करते हैं. स्थानीय लोग उत्सव में नृत्य करते हैं, केसर हलवा तैयार करते हैं और पतंग उड़ाते हैं.

पंजाब और हरियाणा

पंजाब और हरियाणा में भी बसंत पंचमी का पर्व ज्‍यादातर लोग मनाते हैं. इस दिन सुबह जल्‍दी उठकर स्‍नान आदि के बाद लोग मंदिर या गुरुद्वारे जाते हैं. एक दूसरे को इस पर्व की बधाई देते हैं और पतंगबाजी की जाती है. लोग लोक गीत गाते और नृत्य करते हैं. मक्के की रोटी और सरसों का साग, खिचड़ी और मीठे चावल आदि व्‍यंजन तैयार करके इनका आनंद लेते हैं.

 

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