देश अघोषित इमरजेंसी के दौर से गुजर रहा, जेडीयू का आरोप; भाजपा देश में तनाव का माहौल पैदा कर रही

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जदयू ने कहा है कि केंद्र की भाजपा सरकार लोकतंत्र में असहमति के अधिकार को भी देशद्रोह के रूप में देख रही है। विपक्ष की आवाज बंद करना चाहती है। इसके लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का भी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह अत्यंत दुखद है। लगता है कि देश अघोषित इमरजेंसी के दौर से गुजर रहा है। जदयू ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठक में पारित प्रस्ताव में यह बात कही है।

बैठक के बाद पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने बैठक में साफ किया है कि अब भाजपा के साथ उनका जीवन में कभी समझौता नहीं हो सकता है। भाजपा देश में तनाव का माहौल पैदा कर रही है। महंगाई चरम सीमा पर पहुंच गई है। खाद्य पदार्थों से लेकर तेल, रसोई गैस, पेट्रोल, डीजल एवं अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें हर महीने बढ़ रही है। दूसरी तरफ किसानों को उनके उत्पाद का समर्थन मूल्य भी नहीं मिलता है। खाद और बीज की किल्लत से उन्हें जूझना पड़ता है। देश में वह तनाव का माहौल पैदा करने में लगी है।

पार्टी द्वारा जारी प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि विभिन्न राज्यों में गैर भाजपा सरकारों के साथ इनका क्या सलूक है, यह प्रत्यक्ष देखा जा सकता है। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र इसका उदाहरण है। दिल्ली एवं झारखंड में क्या हो रहा है, देश इसे भी देख रहा है। देश यह भी देख रहा है कि भाजपा अपने सहयोगियों के साथ क्या व्यवहार कर रही है। परिणाम है कि आज एक भी महत्वपूर्ण सहयोगी उनके साथ नहीं है।

देश विकल्प की मांग कर रहा
जदयू ने कहा कि इसमें दो राय नहीं कि देश आज विकल्प की मांग कर रहा है। इसके लिए विपक्षी दलों को एकजुट होना होगा। आपस के छोटे-मोटे मतभेदों को भुलाकर देश-हित में सबको एक मंच पर आना होगा। जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की यह बैठक मानती है कि विपक्षी एकता आज देशहित में समय की मांग है। जदयू विपक्षी एकता का समर्थन करता है और अपने नेता नीतीश कुमार को इस दिशा में पहल करने के लिए अधिकृत करता है। आज देश नाजुक दौर से गुजर रहा है। लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं के दायरे से हटकर केंद्र की सत्ता अधिनायकवाद की तरफ बढ़ रही है। जनता की समस्याओं पर उसका ध्यान नहीं है। देश में सांप्रदायिक उन्माद पैदा कर सामाजिक एकता के ताने-बाने को तोड़ने की कोशिश हो रही है।

पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है। समाज में असहिष्णुता और कट्टरता बढ़ी है। दलितों और आदिवासियों को प्रताड़ित किया जा रहा है। धार्मिक प्रतीकों के भावनात्मक मुद्दे उछाल कर समाज में तनाव एवं टकराव पैदा किया जा रहा है। कंपनियों की आमदनी बढ़ने बावजूद उनके कॉरपोरेट टैक्स को 30 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, जिसके चलते तीन वर्षों में सरकारी खजाने को तीन लाख करोड़ का नुकसान हुआ है। पिछले दस सालों में सरकारी बैंकों ने दस लाख करोड़ रुपये कर्ज की रकम बट्टे खाते में डाल दी है। देश में रेलवे प्लेटफॉर्म/राष्ट्रीय उच्च पथ एवं अन्य उपक्रमों के अधीन योजनाओं को अपने चहेते पूंजीपतियों के हवाले कर रही है। देश जानना चाहता है कि वे कौन लोग हैं, जिन पर केंद्र सरकार मेहरबान है।
अग्निपथ योजना देश की सुरक्षा से खिलवाड़
केंद्र की सरकार ने भारतीय सेना में पूर्व के नियुक्ति प्रक्रिया को समाप्त कर अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीर के नाम से मात्र चार वर्ष के लिए नौजवानों के भर्ती की योजना लागू की है। इस प्रकार का निर्णय देश की सुरक्षा से खिलवाड़ है।

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