दिल्‍ली से दोगुनी अधिक खराब हुई बिहार के शहरों की हवा, पटना से भी बुरा हाल है बेतिया का

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 बिहार के तमाम दूसरे शहरों की तरह ही पटना में भी हवा की गुणवत्‍ता सर्दी का मौसम आते ही काफी अधिक खराब हो जाती है। लेकिन, सवाल यह है कि इसकी असली वजह क्‍या है? अक्‍सर लोग इसके लिए दिवाली के पटाखे, गाड़‍ियों और कारखानों के धुएं के साथ ही खेतों में पराली जलाने को मुख्‍य कारण माना जाता है। लेकिन, असली वायु प्रदूषण में असली रोल किसी और चीज का है।

पटना में 340 रहा औसत एक्‍यूआइ

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से हर दिन शाम को चार बजे देश के प्रमुख शहरों का पिछले 24 घंटे के लिए औसत वायु गुणवत्‍ता सूचकांक (Air Quality Index) जारी किया जाता है। मंगलवार की शाम जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक पटना का औसत एक्‍यूआइ 340 रिकार्ड किया गया, जो काफी खराब है। यह एक्‍यूआइ पटना में स्‍थापित छह मानिटरिंग स्‍टेशनों के जरिए रिकार्ड किया गया।

दिल्‍ली से काफी खराब हुई बिहार की हवा

बिहार के ही मुजफ्फरपुर में एक्‍यूआइ 358, भागलपुर में 269, बेतिया में 424, बिहारशरीफ में 304 रिकार्ड किया गया। बेतिया का हाल तो अब खतरनाक हो चला है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं कि पटना का हाल हर जगह बेतिया से बेहतर है। दरअसल, पटना के अलग-अलग छह केंद्रों के मापन में काफी अंतर है। इसके चलते औसत भले कम हो, लेकिन शहर के कई इलाकों में प्रदूषण का स्‍तर खतरनाक है। दिल्‍ली का एक्‍यूआइ 227, गाजियाबाद का 172, ग्रेटर नोएडा का 212 और गुरुग्राम का 217 रिकार्ड किया गया।

हार के अन्‍य शहरों का हाल

  • गया – 206
  • अररिया – 256
  • आरा – 275
  • औरंगाबाद – 229
  • बक्‍सर – 390
  • छपरा – 360
  • दरभंगा – 339
  • कटिहार – 404
  • किशनगंज – 203
    • मुंगेर – 229
    • पूर्णिया – 367
    • राजगीर – 219
    • सिवान – 430
    • हाजीपुर – 290
    • हावड़ा – 217

    इन शहरों से जरा तुलना करके देखें

    • अगरतला – 162
    • आगरा – 104
    • अहमदाबाद – 133
    • अजमेर – 139
    • अलवर – 98
    • अंबाला – 71
    • अमृतसर – 84
    • आसनसोल – 255
    • बरेली – 104
    • भोपाल – 279
    • फरीदाबाद – 170
    • गोरखपुर – 117
    • गुवाहाटी – 113
    • इंफाल – 112
    • इंदौर – 145
    • जयपुर – 141
    • कानपुर – 182
    • कोलकाता – 223
    • कोटा – 266
    1. लखनऊ – 218

    जिंदगी के लिए लायक हवा तो यहां है

    • आइजोल – 22
    • बेंगलुरू – 67
    • चंडीगढ़ – 92
    • चेन्‍नई – 96
    • एर्नाकुलम – 48
    • गंगटोक – 64
    • हैदराबाद – 87
    • जालंधर – 89
    • कोहिमा – 67

     

    हवा की खराब गुणवत्‍ता का ये हैं कारण

    रिपोर्ट के मुताबिक पटना में हवा की गुणवत्‍ता खराब करने में मुख्‍य योगदान पीएम-10 और पीएम 2.5 कणों का है। पीएम-10 में भारी और बड़े अवांछित कण आते हैं, जो मुख्‍य रूप से धूल और धुएं की वजह से हवा में आते हैं। पीएम 2.5 कणों का आकार इनसे छोटा होता है, लेकिन इनके पीछे का कारण भी लगभग वही है।

  • सड़कों पर धूल की परत सबसे बड़ा कारण

     

    पटना की हवा लगातार खराब होती जा रही है। वातावरण में धूलकण बढ़ जाने से लोगों में एलर्जी की समस्या बढ़ती जा रही है। राजधानी में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण सड़कों पर पड़ी धूलकण की मोटी परत एवं वाहनों से निकलने वाली गैसें है। सामान्यत: शहर में 100 के आसपास रहने वाला एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई ) वर्तमान में 250 से अधिक रह रहा है। यह मानव स्वास्थ्य के लिए घातक है।

  • नमी के कारण धूलकणों को फैलने का नहीं मिल रहा मौका

    बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष डा.अशोक कुमार घोष का कहना है कि राजधानी में धूलकण के कारण ही प्रदूषण की समस्या गंभीर होती जा रही है। मौसम में नमी बढ़ने के कारण धूलकण वातावरण में फैल नहीं पा रहा है। इससे मानव स्‍वास्‍थ्‍य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

    धूलकण के कारण एलर्जी बन रही परेशानी का कारण

    पटना मेडिकल कालेज एण्ड हास्पिटल के वरिष्ठ हार्ट रोग विशेषज्ञ डा.अशोक कुमार का कहना है कि वायु प्रदूषण के कारण आजकल एलर्जी की समस्या काफी बढ़ गई है। लोग सर्दी-खांसी की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। प्रदूषण के कारण कई लोगों में तनाव की समस्या भी बढ़ रही है। तनाव कई बीमारियों की जननी है।

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