कभी एक स्टेज शो में गाने को तरसता था ये बिहारी सिंगर, अब अनुराग कश्यप खुद कॉल करके बुलाते हैं अपनी फिल्म में गाने के लिए

एक बिहारी सब पर भारी बिहारी जुनून

कभी गाँव में रात भर एनाउंसर को रिक्वेस्ट करने पर भी नहीं मिला था गाने का मौका, गैंग्स ऑफ़ वासेपुर में गाने के बाद बदल गई ज़िन्दगी..

मुजफ्फरपुर के एक छोटे से गाँव आथर के इस लड़क ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की यूँ एक दिन वो बॉलीवुड की सुपरहिट मूवी में पॉपुलर गाना गाएगा।

कुछ ऐसी ही कहानी है मुजफ्फरपुर जिले के एक छोटे से गाँव के किसान पंकज ठाकुर के पुत्र दीपक कुमार की जिन्होंने  गैंग्स ऑफ़ वासेपुर फिल्म के दोनों ही पार्ट्स में गाना गया है।

ऐसा भी नहीं है की दीपक को सबकुछ बहुत ही आसानी से मिल गया। एक बिहारी सब पर भारी के साथ हुई बातचीत में दीपक ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने संगीत गुरु डॉ. संजय कुमार संजू को देते हुए कहते हैं की गुरु के बिना मुकाम तक पहुंचना मुमकिन नहीं था।

गायक बनने का सपना उन्हें बचपन से था। एक गरीब किसान होने के वाबजूद उनके पिता ने अपने बेटे का संगीत के प्रति लगाव को समझा और दीपक जब मात्र सात वर्ष के थे, तभी उनका एडमिशन संगीत गुरु डॉ. संजय कुमार संजू के पास कराया। डॉ. संजय कुमार संजू ने दीपक को विधिवत शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दी।

म्यूजिक के प्रति उनके इस जूनून से उनकी पढाई पर भी असर पड़ा। 2009 में दशवीं की पढ़ाई ताजपुर सेंट्रल स्कूल समस्तीपुर से पूरी की। उसके बाद अपने भजन एल्बम ‘नवमी का उपवास’ में इतने मशगूल हो गए की 2011 में बारहवीं की परीक्षा भी वक्त पर न दे सके। ‘नवमी का उपवास’ एल्बम दीपक का पहला सपना था जो उन्होंने दिन रात मेहनत करके पूरा किया। कई लोगों से कर्ज लेकर उन्होंने अपना एल्बम रिलीज़ किया जिसके सारे गीत उन्होंने खुद ही लिखे थे। इस एल्बम को श्रोताओं ने खूब सराहा।

दीपक बताते हैं की DIG गुप्तेश्वर पांडेय जी ने भी स्टेज शोज और प्रोग्राम्स में गाने के कई मौके दिलाये और साथ ही भोजपुरी भी सिखाई ताकि स्थानीय श्रोताओं के दिलों में जगह बना सकूं।

हर इंसान की तरह दीपक का भी सपना था की वो कुछ बड़ा करें और उनके हुनर को लोग जाने, उन्हें पहचाने। “मुझे आज भी याद है की पहले शो में गाने के लिए मैंने कितनी कोशिशें की। रात भर स्टेज के पीछे खड़ा रहा, एनाउंसर से रिक्वेस्ट करता रहा की गाने का एक मौका दे दें, लेकिन मुझे गाने का मौका नहीं मिला और मैं निराश वापस लौट आया। मेरी बड़ी ख्वाइश थी की मैं स्टेज पर गाऊं और लोग मुझे सुने, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। फिर जब मौका मिलना शुरू हुआ तो लोग बुलाकर ले जाते और फ्री में गवाते।

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मैं अपनी जेब से खर्च कर जाता था गाने , बस इस उम्मीद पर की कभी तो मेरे दिन बदलेंगे और मुझे भी मेरी मेहनत और हुनर का मेहनताना मिलेगा।” दीपक ने अपने पुराने दिन याद करते हुए कहा।
लेकिन दीपक ने कभी हार नहीं मानी और उनके जूनून और काबिलियत को देखते हुए उनके संगीत गुरु के साथ ही कई पदाधिकारियों ने भी काफी सपोर्ट दिया। उन्हें शोज दिलाये और फाइनेंसियल सपोर्ट भी किया। गुप्तेश्वर जी के अलावा आईपीएस अरविन्द पांडेय जी ने भी शोज में गाने के मौके दिलवाये और अपनी संस्था “बिहार भक्ति आंदोलन” के तहत आर्थिक मदद भी किया।

“बात 2011 की है जब गैंग्स ऑफ़ वासेपुर की म्यूजिक डायरेक्टर स्नेहा खानवॉकर यूपी और बिहार में घूम-घूमकर फिल्म के लिए नई आवाज खोज रही थीं। जैसा की ये फिल्म झारखण्ड के वास्सेपुर पर आधारित थी, उन्हें उसके लिए एक बिहारी टोन वाली आवाज़ चाहिए थी। वो जब मुजफ्फरपुर आईं तो मेरे गुरु ने मुझे बताया और ऑडिशन के लिए मुझे ले गए।

मैं बड़ी उत्सुकता से वहां मैं अपना हारमोनियम साथ लेकर गया और ‘हमनी के छोड़ के नगरिया ऐ बाबा.. ‘ वाला भजन गाया जिसे उन्होंने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर रही थीं। फिर वो कई जगह घूमीं और वॉइस सैंपल कलेक्ट करके मुंबई ले गईं।

मैं भी सब भूलकर अपनी किस्मत आजमाने की कोशिश में लगा हुआ था। स्टेज शोज और अपनी भजन एल्बम निकलने के लिए स्ट्रगल कर रहा था। तभी, ठीक एक साल बाद मुझे कॉल आया की ‘दीपक आपको वासेपुर- 2 में एक गाना गाना है।’

ये सब मेरे लिए किसी सपने की तरह था। फिल्म के डायरेक्टर-प्रोडूसर अनुराग कश्यप को मेरी आवाज़ और वो गाना इतना अच्छा लगा की उन्होंने वो मोबाइल में रिकॉर्ड किया हुआ गाना फिल्म के पार्ट वन में वैसे ही फिल्म में इस्तेमाल किया। और फिल्म के पार्ट वन रिलीज़ होने से पहले ही पार्ट टू का गाना रिकॉर्ड करना था।

मुझे मुंबई जाने के लिए उन्होंने न सिर्फ मेरे लिए, बल्कि मेरे अंकल के लिए भी फ्लाइट की टिकट भेजी जिनके साथ मुझे मुंबई जाना था। वहां जाकर मैंने ‘मूरा’ गाना रिकॉर्ड किया। वहां अनुराग कश्यप सहित कई फीमी हस्तियों से मिलने का मौका मिला। अनुराग सर हमेशा ही नए टैलेंट को निखारते हैं।

वहां से जब रिकॉर्डिंग करके आया वापस तो मेरी दुनिया ने अलग ही मोड़ ले लिया था। मेरे गाने की तारीफ तो पहले भी लोग किया करते थे। लेकिन बॉलीवुड की फिल्म का ऑफिसियल सिंगर बनने के बाद मानो मेरे टैलेंट पर मुहर लगाने का काम किया। सभी मीडिया वाले मेरा इंटरव्यू लेना चाहते थे। लोग मुझे पहचानने लगे थे।

मेरे घरवाले ख़ुशी से रो पड़े जब फिल्म में सिंगर के तौर पर मेरा नाम देखा। जो लड़का कभी मुजफ्फरपुर से बहार नहीं गया था, वो फ्लाइट से मुंबई गया और बॉलीवुड फिल्म का सिंगर बन गया।

मेरा ऑटॉग्राफ और मेरे साथ फोटो खिचवाना चाहते थे। वो सबकुछ बहुत ही खास था। ज़िन्दगी का वो लम्हा मैं बयां नहीं कर सकता, वो बस महसूस करने की चीज़ है।”

हालाँकि दीपक की पढाई सुचारू रूप से नहीं हो पाई लेकिन फिर भी दीपक ने 2013 में अपनी बारहवीं की परीक्षा दी और उसके बाद एल.एन. मिश्रा इंस्टिट्यूट से बेबीए किया। कॉलेज के प्रोफेस्सोर्स को जब पता चला की वो गैंग्स ऑफ़ वासेपुर के सिंगर हैं तो सभी ने बहुत ही प्यार, सपोर्ट और रेस्पेक्ट दी।

वक्त बीतने के साथ गैंग्स ऑफ़ वासेपुर को लोग भूल चुके थे। भाई-बहनों में सबसे बड़े दीपक की एक बहन ने ग्रेजुएशन की पढाई पूरी कर ली और एक अभी ग्रेजुएशन कर रही। पिता किसान हैं और माँ मीरा देवी बिहार सरकार में नर्स की नौकरी करती हैं। घर का बड़ा बेटा होने की वजह से दो छोटी बहनों की जिम्मेदारी भी उनपर थी। ज़िन्दगी की रेस का स्ट्रगल करने का दौर फिर से आया था। वो आगे एमबीए करना चाहते थे, परन्तु पैसों की कमी की वजह से आगे नहीं पढ़ सके।

कहते हैं न वक्त एक सा नहीं रहता। दीपक की ज़िन्दगी फिर से करवट ले रही थी….

“एक बार फिर मुझे अनुराग कश्यप ने 15 नवंबर 2016 को कॉल किया की उनकी अगली फिल्म मुक्का बाज़ में गाना गाना है और बहुत जल्दी ही मुंबई की टिकट भेजेंगे। इस फिल्म में जिमि शेरगिल और रवि किशन किरदार निभा रहे।

उस दिन मैं बहुत रोया। मेरी ज़िन्दगी का सबसे खुनसीब दिन था वो। मुझे विस्वास नहीं हो रहा था की इतने बड़े फिल्म निर्माता- निर्देशक ने मुझे याद रखा और कॉल किया।

यही नहीं, पहले उन्होंने मुझे इंस्टाग्राम पर फॉलो किया और मेरे एक गाने “बोल न माहि बोल न” पर कमेंट भी किया था। सब कुछ फिर से सपने का सच होना जैसा था।” कहते हुए दीपक की आँखें ख़ुशी से चमक उठीं।

अपने स्ट्रगल के दिन याद कर दीपक बताते हैं की कभी वो वक्त था की मैं सबसे एक मौका देने की रिक्वेस्ट करता रहता था। लेकिन मेरी मेहनत रंग लाई। दीपक अनुराग कश्यप की अगली फिल्म मुक्केबाज़ में गाने के साथ ही अपने एल्बम पर भी काम कर रहे हैं जिसे अनुराग कश्यप प्रोड्यूस कर रहे। इतना ही नहीं, दीपक के टैलेंट ने अनुराग कश्यप को इतना प्रभावित किया की अनुराग दीपक की आगे की पढाई का खर्च भी वहां करने को तैयार हैं।

 

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