जब मन में लक्ष्य पाने की लगन हो तो उम्र और जिम्मेदारियां राह में रुकावट नहीं डालती। यह बात पटना की नीलम कुमारी ने सच साबित किया है। दो बच्चों को संभालने के साथ परिवार की जिम्मेदारी थी। जज बनने का सपना था सो तमाम परेशानियों के बाद भी अपने सपने को पूरा करने की कोशिश में जुटी रहीं। उनकी इसी लगन का फल नवंबर माह के अंतिम सप्ताह में आए बिहार न्यायिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा के फाइनल रिजल्ट में मिला। नीलम 453 रैंक पर आकर जज बनने में सफल रहीं। 

सबसे पहले पिता ने किया फोन
नीलम कुमारी ने कहा कि मेरे पिता सत्यनारायण प्रसाद हाईकोर्ट में सरकारी वकील हैं। रिजल्ट सबसे पहले भैया ने देखा फिर उन्होंने पिता जी को बताया। रात के करीब 9:30 बजे पिता जी का फोन आया। उन्होंने कहा कि अब तुम जज बन गई हो। मैं तो वकिल ही रहा। अब तुम्हारे कोर्ट में जाउंगा तो खड़े रहना होगा। 

दो बच्चों को संभालने के साथ की परीक्षा की तैयारी
नीलम ने कहा कि जब कुछ बनने की लगन हो तो तैयारी के लिए समय निकल ही जाता है। दो बच्चों को संभालने, उन्हें स्कूल पहुंचाने और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के साथ मैंने परीक्षा की तैयारी की। बच्चों के सोने के बाद देर रात तक पढ़ती थी। फिर बच्चों को स्कूल भेजने के बाद पढ़ती थी। पति शंकर बाला ने इस दौरान सपोर्ट किया। मेरी शादी 2002 में हुई थी। तब मैं बीए पार्ट वन की छात्रा थी। शादी के बाद भी पढ़ाई जारी रखा।

Sources:-Dainik Bhasakar

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