दरभंगा के सिलीप रॉय डिजिटल आर्ट में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित

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कहते हैं प्रतिभा किसी मौके की मोहताज नहीं होती। चाहे परिस्थितियां आगे खड़ी होकर कितना भी रास्ता रोके, प्रतिभावान व्यक्ति अपने लिए रास्ते बना ही लेते हैं। यह कथन बिहार के दरभंगा जिले के गांधीनगर मोहल्ला निवासी सिलीप रॉय पर सटीक बैठता है। सिलीप रॉय को दिल्ली के ‘आल इंडिया फाइनआर्ट एंड क्राफ्ट सोसाइटी’ (आयफेक्स) द्वारा  11वीं अखिल भारतीय डिजिटल आर्ट प्रदर्शनी में  प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

सिलीप राय को यह पुरस्कार उनके चित्र श्रृंखला ‘प्रवासी’ के लिए दिया गया, जिसमें उन्होंने कोरोना काल में प्रवासी मजदूरों की गंभीर परिस्थितियों को चित्रित किया है। उन्हें यह पुरस्कार विख्यात मूर्तिकार पद्मभूषण श्री राम सुतार जी से मिला, जिन्होंने विश्व की सबसे बड़ी मूर्ति सरदार वल्लभभाई पटेल की ‘स्टेचू ऑफ़ यूनिटी’ बनाया है। यह क्षण सिलीप रॉय के लिए काफी रोमांचक और गौरवान्वित करने वाला था, जब प्रथम पुरस्कार के लिए उनके नाम के साथ दरभंगा, बिहार जोड़ कर घोषणा की गई।

BHU से ग्रेजुएट व मास्टर डिग्री 

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी से अप्लाइड आर्ट में स्नातक और स्नातकोत्तर कर चुके सिलीप ने ऐड एजेंसी में अपने कॅरियर की शुरूआत 2016 में किया। आज क्रिएटिव आर्ट डायरेक्टर व स्टोरीबोर्ड आर्टिस्ट के तौर पर कार्य करते हुए उन्होंने देश-विदेश के पांच सौ से अधिक ब्रांड के प्रमोशनल एड में अपना योगदान दिया है, जिनमें से माउंटेन ड्यू, पेप्सी, कोक, डोमिनोस, लेज़, कुरकुरे, होंडा, इत्यादि जैसे प्रमुख ब्रांड के लिए टीवी विज्ञापन शामिल हैं।

दरभंगा स्टेशन पर बैठ कर निरंतर स्केच का अभ्यास करते हुए सिलीप को शहर से अत्यंत भावनात्मक जुड़ाव हुआ। वर्तमान में दिल्ली में रहते हुए वे अपने शहर लौट कर उसका कलात्मक विकास में अपना योगदान देने की आकांक्षा रखते हैं।

केवल छः साल के करियर में ऊंचा मुकाम हासिल करने वाले सिलीप की जिंदगी कठिनाइयों से भरी रही है। पिता राम सुरेश राय दरभंगा बस स्टैंड में मजदूरी करके नौ सदस्यों के परिवार का भरण-पोषण करते रहे हैं। माता सरोज देवी ने पूरी जिंदगी अपनी अस्वस्थ बेटी की सेवा में समर्पित कर दिया है।

किराए के मकान में रहता है सिलीप का परिवार

सिलीप का परिवार आज भी किराये के मकान में रहता है। शुरू से चली आ रही आर्थिक तंगी और अन्य समस्याओं से जूझते हुए आज अपने करियर के ऊंचे मुकाम पर पहुंच चुके सिलीप राय कहते हैं कि ने जीवन में कड़ी मेहनत, अनुशासन,और आत्मविशवास को सर्वाधिक महत्व दिया है। लम्बे समय से चली आ रही अभाव व मज़बूरी की ज़िन्दगी में जहां लोग टूट जाते हैं, वहीं यह मेरे आगे बढ़ने की सबसे बड़ी प्रेरणा थी। परिस्थितियां कभी रास्ता नहीं रोकती, बल्कि हमें मजबूती से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। अतीत में आई कई कठिनायों के बाद हर बार महसूस होता था कि जिंदगी में कुछ बड़ा करना है। कला के क्षेत्र में कदम रखना भी कम चुनौतीपूर्ण नहीं था लेकिन मानसिक रूप से व्यक्ति मजबूत हो तो चुनौतियां उनके लिए मनोरंजन का खेल बन जाता है।

युवाओं को संदेश देते हुए सिलीप ने कहा है कि जो कोई भी कला के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं उन्हें समर्पित होकर निरंतर अभ्यास और संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए। यह क्षेत्र उनको देने के लिए ढेर सारी संभावनाएं लेकर उनका इंतज़ार कर रही है। पारिवारिक अथवा सामाजिक अवहेलना को नज़रअंदाज़ करते हुए युवा उन लोगों से जुड़े जो उनके सपनों के समर्थक हों।

जिला, राज्य और राष्ट्रिय स्तर पर कई पुरस्कारों से सम्मानित सिलीप राय को इसी वर्ष देशभर के 2600 युवाओं में से टॉप 15 युवाओं में ‘बेस्ट स्टोरीटेलर’ का स्थान प्राप्त हुआ, जिनका चयन जानेमाने लेखक-कवि प्रसून जोशी जैसे दिगज्जों द्वारा किया गया। पुरस्कार के साथ उन्हें एक लाख की राशि भी प्रदान किया गया। सिलीप अपने जीवन की उपलब्धियों को माता-पिता के साथ-साथ अपने बड़े भाई दिलीप राय को समर्पित करते हैं, जिन्होंने स्वयं विषम परिस्थितियों में रहकर इनके पठन-पाठन में आर्थिक और मानसिक सहयोग किया। साथ ही अपने दोस्तों का सहयोग और गुरुजनों स्वर्गीय जय किशोर महासेठ और राकेश सिंह के आशीर्वाद और योगदान का अपने जीवन में अमूल्य स्थान मानते हैं।

 

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