साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए पटना पुलिस लेगी बीटेक छात्रों की मदद

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साइबर अपराधी हर दिन किसी ने किसी को झांसा देकर उनके बैंक खाते से पैसे उड़ा रहे हैं। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस भी मामला दर्ज कर रही है, लेकिन अधिकांश मामले अनसुलझे रह जा रहे हैं। ऐसे में अब पटना में बढ़ रहे साइबर क्राइम के मामलों को सुलझाने के लिए बी-टेक पास छात्रों से मदद लेने की तैयारी की जा रही है। साइबर सेल में उन्हें कांट्रैक्ट पर शामिल किया जायेगा। इससे केस के अनुसंधानकर्ता को मदद मिलने के साथ ही साइबर अपराधी को पकड़ने और गंभीर से लेकर छोटे मामलों की तह तक जाने में भी पुलिस को आसानी होगी। पटना के रेंज आईजी राकेश राठी ने बताया कि इस तरह का एक प्रस्ताव ईओयू को भी भेजा गया है।

ज्यादातर मामलों में लिंक भेजकर खाते से उड़ा रहे रकम

शहरी क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक थानों में हर महीने सौ से अधिक केस दर्ज हो रहे हैं। इसमें अधिकांश मामलों में लोग लिंक पर क्लिक कर, एप डाउनलोड करने और ओटीपी शेयर करने के बाद ठगी के शिकार हो रहे हैं। इसमें अधिकांश लोगों के खाते से 20 हजार से लेकर दो लाख रुपये तक की निकासी हो रही है। रकम कम होने की वजह से अधिकांश मामलों में पुलिस केस तो दर्ज कर लेती है, लेकिन उसके पहले से अन्य केस का दबाव होने की वजह से उन मामलों पर ध्यान नहीं देती और पीड़ित थाने का चक्कर लगाता रहता है।

कई पुलिस पदाधिकारियों को मिल चुका प्रशिक्षण

साइबर क्राइम से निपटने के लिए आर्थिक अपराध इकाई द्वारा समय समय पर थानेदार से लेकर अन्य पुलिस पदाधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है, लेकिन कई ऐसे अनुसंधानकर्ता हैं, जिन्हें तकनीकी जानकारी कम है। इस वजह से भी कई मामले सुलझ नहीं पाते हैं और साइबर अपराधी पैसे को एक से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर निकासी कर लेते हैं। साइबर क्राइम के मामले दिनों दिन बढ़ते जा रहे हैं। क्या आम और क्या खास, ये सबको अपना शिकार बना रहे हैं। पुलिस के लिए ऐसे मामले सिरदर्द बनते जा रहे हैं। अपराधी ऐसे-ऐसे तरकीब अपनाते हैं कि पुलिस भी हैरान रह जाती है। ऐसे में अब बीटेक छात्रों से उनपर लगाम कसने की उम्मीद है।

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