कोरोना विशेषज्ञों के दावों पर भारी पड़ रही बच्चों की इम्युनिटी, 20 जनवरी तक चार प्रतिशत से भी कम बच्चों हुए संक्रमित

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कोरोना विशेषज्ञों ने बड़े-बड़े दावे किये थे कि तीसरी लहर में बच्चे ज्यादा संक्रमित होंगे। इन विशेषज्ञों के दावों के अनुरुप स्वास्थ्य विभाग ने मायागंज अस्पताल के शिशु रोग विभाग के सामान्य वार्ड से लेकर नीकू-पीकू को कोरोना के इलाज के लिए तैयार किया। जिले के अनुमंडल एवं सदर अस्पतालों में भी कोरोना संक्रमित बच्चों के इलाज के लिए इंतजाम कराया, लेकिन जिस तरह से कोरोना की तीसरा लहर में कम संख्या में बच्चे कोरोना संक्रमित हुए, उस हिसाब से लग रहा है कि तीसरी लहर में कोरोना विशेषज्ञों के दावों पर बच्चों की इम्युनिटी भारी पड़ रही और बच्चों से कोरोना का वायरस हार रहा है।

तीसरी लहर में 20 जनवरी तक जिले में कोरोना के 2196 मामले जिले में पाये जा चुके थे। इनमें से 82 यानी करीब चार प्रतिशत बच्चे ही संक्रमित हुए। जिनकी उम्र शून्य से 14 साल के बीच रही। मायागंज अस्पताल के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजकमल चौधरी ने बताया कि मायागंज अस्पताल में 20 जनवरी तक 51 कोरोना मरीज इलाज के लिए भर्ती हुए। इनमें से एक भी कोरोना संक्रमित बच्चा नहीं था। इस बार भी कोरोना संक्रमित कुल 84 बच्चों में से करीब 95 प्रतिशत बच्चे एसिम्प्टोमैटिक (बिना कोरोना के लक्षण) हैं। हां, कुछ बच्चों में सर्दी, नाक का बहना व खांसी की शिकायत मिल रही है, जो कि सामान्य बात है।

 

पहले मां फिर गाय-भैसों का दूध बचा रहा बच्चों को कोरोना से

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. (प्रो.) आरके सिन्हा ने बताया कि जन्म के बाद मां का दूध फिर बाद में बच्चों द्वारा पीया जाने वाला गाय-भैंस का दूध बच्चों को कोरोना के वायरस से बचा रहा है। मां का दूध पीने वाले बच्चों में इम्युनिटी विकसित होती है, जिससे बच्चे कोरोना से बहुत हद तक सुरक्षित हैं। इसके अलावा गाय-भैस के दूध में मिलने वाला लैक्टोबैकिलस बच्चों की इम्युनिटी को बढ़ा रहा है। 

इसके अलावा भारतीय बच्चे हर साल औसतन चार से पांच बार सर्दी, खांसी, जुकाम आदि का सामना करते रहते हैं। इन बीमारियों से लड़ते-लड़ते बच्चों में कोरोना के वायरस से लड़ने की इम्युनिटी विकसित हो जाती है, जिससे वे तीसरे लहर में भी कोरोना से पूरी तरह महफूज है। तीसरा और अहम बात, बच्चों के नाक, मुंह व गले में ही एसीई (एंजियोटेंसिन कन्वर्टिंग एंजाइम) 2 पाये जाते हैं, न कि फेफड़े में। ऐसे में अगर बच्चा कोरोना से संक्रमित होगा भी तो कोरोना के वायरस को फेफड़े में नहीं जाने देगा और बच्चा मामूली लक्षण के साथ संक्रमित रहेगा और ठीक हो जाएगा। बच्चों को अस्पताल जाने की जरूरत ही नहीं होगी।

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