कोरोना के बाद दोगुने हुए आयुर्वेद से इलाज कराने वाले, इम्युन पावर मजबूत करने के लिए अधिक भरोसा

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देश की पांच हजार वर्ष से अधिक पुरानी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के प्रति लोगों का रुझान बढ़ने लगा है। कोरोना की पहली और दूसरी लहर के बाद इस पद्धति से इलाज कराने वालों की संख्या डेढ़ से दोगुनी बढ़ी है। पहली और दूसरी लहर के दौरान जब लाकडाउन के सख्त प्रविधानों के कारण पीएमसीएच, एम्स, आइजीआइएमएस जैसे बड़े अस्पतालों में रोगियों की संख्या घटी थी, वहीं इम्युन पावर मजबूत रखने के लिए यहां रोगियों की कतार लग रही थी। कोरोना के पूर्व 2019 में यहां 1 लाख 18 हजार 777 लोगों ने इलाज कराया था। वहीं 2020 और 2021 में लाकडाउन और कोरोना के खौफ के बावजूद यहां 70,942 और एक लाख 3 हजार 818 लोगों ने इलाज कराया था।

राजकीय आयुर्वेदिक कालेज के अधीक्षक डा. विजय शंकर दुबे ने बताया कि वर्षवार अस्पताल में उपचार कराने वाले रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। आयुर्वेदिक कालेज में 2020 में सख्त लाकडाउन के कारण रोगियों की संख्या कुछ कम हुई, लेकिन 2021 में यह न केवल अपने पूर्व के स्तर पर पहुंच गया बल्कि छह विभागों में रोगियों की संख्या 2019 से भी अधिक रही। भर्ती होकर उपचार कराने वाले रोगियों की संख्या तो 2020 व 2021 दोनों में तीन से पांच गुना तक रही। मोतियाबिंद की सर्जरी तो पहले से होती थी। हाल के वर्षों में पुराना बवासीर, भगंदर, फिस्टुला आदि का क्षारसूत्र से स्थायी उपचार कराने वालों की संख्या काफी बढ़ी है। इसके साथ ही नसों को दबाकर कमर दर्द, फ्रोजेन शोल्डर जैसी समस्याओं का जल्द व स्थायी उपचार किया जा रहा है। अनुसंधान विभाग में चर्म रोग के साथ अन्य जटिल उपचारों का इलाज उपलब्ध है। बड़ी संख्या में लोग मधुमेह, हाइपरटेंशन और थायराइड जैसे रोगों का इलाज करा रहे हैं।

वर्तमान में आयुर्वेदिक कालेज में एक्स-रे, डिजिटल एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, खून की सभी आवश्यक जांचों की सुविधा निशुल्क उपलब्ध है। इसके अलावा जल्द ही दंत उपचार भी शुरू हो जाएगा। पंचकर्म, नेत्र रोग, ईएनटी, सर्जरी और मेडिसिन विभाग में यहां सबसे अधिक मरीज आते हैं। कोरोना के बाद रोग  प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने की इच्छा लेकर आने वालों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य रक्षणम विभाग में भी मरीज बढ़े हैं।

विभाग,       2019,  2020,    2021 ओपीडी में मरीज 

  • -आइ-ईएनटी, 16521, 11249, 16736
  • -सर्जरी, 9903, 8044, 14014
  • – स्त्री एवं प्रसूति रोग, 8620,  4806,  6952
  • –बाल रोग, 5780, 4214, 9528
  • – मेडिसिन, 31220, 15825, 19661
  • – पंचकर्म, 17132, 10403, 13401
  • -अनुसंधान यानी चर्म रोग आदि, 21904, 10577, 15649
  • -स्वास्थ्य रक्षणम योग आदि, 7626, 5627, 7935
  • – इमरजेंसी सेवा, 71,  207,   343

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