बिहार में स्कूल के समय नहीं चला सकते कोचिंग, चलाई तो होगी जेल

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राज्य सरकार प्रदेश में चल रहे कोचिंग संस्थानों की नकेल कसेगी। कोर्स की फीस, छात्र सुविधाएं तथा शिक्षकों की योग्यता समेत कोचिंग अधिनियम के तमाम प्रवाधानों पर कोचिंग संस्थानों की पड़ताल तो होगी ही, इन संस्थानों का शैक्षणिक समय भी तय होगा। स्कूल संचालन की अवधि में कोचिंग संस्थान कतई नहीं चलेंगे। गौरतलब है कि राज्य में 20 मई 2010 से बिहार कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवं विनिमय) अधिनियम-2010 लागू है। सात साल बाद इस अधिनियम पर राज्य सरकार गंभीर हुई है।
शिक्षा मंत्री ने इसी बुधवार को विभाग के शीर्ष अधिकारियों तथा स्नातक तथा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद सदस्यों के साथ बैठक में स्पष्ट कहा था कि कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर रोक लगाई जाए। मंत्री के निर्देश के बाद एक्ट को गंभीरता से लागू करने की तैयारी विभाग ने शुरू की है। मजेदार पहलू यह है कि अधिनियम के लागू होने के सात साल बाद अब इसकी नियमावली बन रही है। नियमावली का प्रारूप अंतिम स्वरूप में पहुंच चुका है। इसके मुताबिक राज्यभर में कोचिंग संस्थान सुबह 9 बजे के पहले और शाम चार बजे के बाद ही चलेंगे। इसके बीच चलने वाले कोचिंग संस्थानों पर अधिनियम के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई होगी और उन्हें बंद भी किया जा सकेगा।
संस्थानों को निबंधन की है अनिवार्यता : बिहार कोचिंग संस्थान अधिनियम 2010 में कोचिंग संस्थानों को निबंधन की अनिवार्यता है। डीएम की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी का प्रावधान एक्ट में है, जिसमें एसपी, डीईओ और अंगीभूत कॉलेज के एक शिक्षक सदस्य हैं।

अधिनियम लागू होने के बाद इस एक्ट के तहत पटना समेत कई जिलों में कोचिंग संस्थानों से आवेदन भी कराए गए, लेकिन बाद में अधिकारियों के तबादलों के बाद अधिनियम पर कार्रवाई शिथिल हो गयी। एक्ट के मुताबिक निबंधन तीन साल के लिए होना है उसके बाद तीन साल का नवीकरण भी अनिवार्य है। पर, एक्ट के उल्लंघन में कोचिंग संस्थान बंद करने तथा 25 हजार के आर्थिक दंड पर अमल के एक भी मामले सात साल में राज्य में नहीं आए।

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