CM नीतीश का ऐलान, बिहार में बारिश का पानी जमा करने को बनाए जाएंगे बड़े-बड़े तालाब

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पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की है कि जल संचयन को लेकर राज्य में बड़े-बड़े तालाबों का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए जो भी राशि की जरूरत होगी, राज्य सरकार देगी। बड़े तालाबों के निर्माण से जल संकट दूर होगा। मुख्यमंत्री मंगलवार को जल-जीवन-हरियाली दिवस के मौके पर अधिवेशन भवन में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजगीर में आर्डिनेंस फैक्ट्री के पास जल संरक्षण के लिए जो तालाब बने हैं, वे अपने आप में अद्भुत हैं। अटल जी की सरकार में जार्ज साहब रक्षा मंत्री थे, उस वक्त आर्डिनेंस फैक्ट्री के शिलान्यास के दौरान मैंने ही तालाब निर्माण का सुझाव दिया था। अगर दो वर्षों तक बारिश नहीं होगी, तब भी आर्डिनेंस फैक्ट्री तथा वहां काम करने वालों के लिए पानी का संकट उत्पन्न नहीं होगा। इसी तर्ज पर राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी बड़े-बड़े तालाब बनाने होंगे। ‘जल-जीवन-हरियाली अभियान में जन-भागीदारी’ विषय पर यह कार्यक्रम आयोजित था। मुख्यमंत्री ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जो भी कार्य सरकार द्वारा किये गये हैं, उसकी जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को दें। तालाबों, आहर, कुओं आदि के जीर्णोद्धार हुए हैं, उनसभी की तस्वीर सोशल मीडिया पर दें। ताकि लोगों को इसकी जानकारी मिले और पर्यावरण संरक्षण के प्रति वे जागरूक और सचेत हों।


 
जल-जीवन-हरियाली : पांच करोड़ पौधे लगेंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत राज्य में पांच करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में हरियाली अभियान की शुरुआत की गई और 24 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया, जिसके तहत 19 करोड़ से ज्यादा पौधारोपण किया गया। इसके बाद राज्य का हरित आवरण नौ प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया है। पांच करोड़ और पौधे लगाने के बाद राज्य का हरित आवरण 17 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। पांच जून से नौ अगस्त 2020 तक तीन करोड़ 91 लाख पौधे लगाए गए।  

हर माह पहले मंगलवार को लोगों से संवाद करें
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर माह के पहले मंगलवार को जल-जीवन-हरियाली दिवस राज्यभर में प्रखंड स्तर तक मनाएं। उन्होंने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि दिवस के दिन लोगों से संवाद करें और जल-जीवन-हरियाली की जानकारी दें। पर्यावरण की सुरक्षा के लिए लोगों को जागरूक करें। पदाधिकारियों को पुआल नहीं जलाने के लिये लोगों को जागरूक करने का भी निर्देश दिया। कहा कि मौसम के अनुकूल फसल कार्यक्रम की शुरुआत पहले आठ जिलों से की गई और बाद में बाकी के 30 जिलों में भी इसकी शुरुआत कर दी गई है।


राष्ट्रीय औसत से अधिक जांच बिहार में
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा कोरोनाकाल के दौरान लोगों को राहत पहुंचाने के लिए कई कार्य किये गये। कोरोना की शुरुआत से ही कोरोना से संबंधित हर रोज हम आंकड़े मंगवाते रहे हैं और उसके आधार पर आकलन कर कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए पदाधिकारियों को निर्देश देते रहे हैं। राज्य सरकार अपनी तरफ से भी खर्च कर कोरोना की टेस्टिंग करवा रही है। पूरे देश में कोरोना संक्रमितों की मृत्यु दर 1.4 प्रतिशत है, जबकि बिहार में यह दर 0.55 प्रतिशत है। 10 लाख लोगों के बीच कोरोना जांच का जो देश का औसत है उसकी तुलना में बिहार में 19 हजार ज्यादा जांच हो रहे हैं।

राज्य सरकार के बेहतरीन प्रयासों को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। राष्ट्रपति महोदय ने ‘डिजिटल इंडिया अवार्ड 2020’ सम्मान से बिहार को सम्मानित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर घर तक बिजली पहुंचा दी गयी है और अब सौर ऊर्जा के लिए काम किये जा रहे हैं। सौर ऊर्जा ही असली ऊर्जा है, जो सूर्य पर आधारित है। राज्य में 1,56,881 सार्वजनिक पोखरों, आहरों, पईनों को तथा 3,577 कुओं को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। इनका जीर्णोद्घार भी कराया गया है। अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद सार्वजनिक पोखरों, आहरों, पईनों के किनारे बसे लोगों को घर बनाने के लिए पैसा दिया जाएगा और उनको बसाया जाएगा।

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