तीखे स्वाद के लिए भारत ही नहीं दुनिया में मशहूर है ‘निमाड़ी मिर्च’, चिली चाचा दिलाएंगे खास पहचान

जानकारी

अपने तीखे स्वाद के लिये देश-दुनिया में मशहूर निमाड़ी मिर्च की खोयी रौनक लौटाने के मकसद से “चिली चाचा” ने मैदान संभाल लिया है. “चिली चाचा” दरअसल वह शुभंकर है जिसे मध्यप्रदेश सरकार ने निमाड़ अंचल में पैदा होने वाली मिर्च की ब्रांडिंग और किसानों को इसकी खेती के लिये प्रोत्साहित करने के लिये पेश किया है. पश्चिमी मध्यप्रदेश के निमाड़ अंचल की गिनती देश के प्रमुख मिर्च उत्पादक क्षेत्रों में पारम्परिक रूप से होती है. लेकिन पिछले कुछ सालों से इस अंचल में मिर्च की खेती के प्रति किसानों के रुझान में गिरावट देखी जा रही है.

राज्य के उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग के आयुक्त एम. कालीदुरई ने बताया, “हम निमाड़ अंचल में मिर्च का उत्पादन बढ़ाना चाहते हैं ताकि किसानों की आमदनी में इजाफा हो और इस मसाला फसल की प्रसंस्करण गतिविधियां और निर्यात रफ्तार पकड़ सके.” उन्होंने बताया कि इस लक्ष्य को हासिल करने के प्रयासों के तहत प्रदेश सरकार ने “चिली चाचा” नाम का शुभंकर पेश किया है

खास मिर्च महोत्सव का आयोजन

इस शुभंकर का अनावरण सूबे के इतिहास के पहले “मिर्च महोत्सव” में किया गया. इस कार्यक्रम का आयोजन राज्य के सबसे बड़े मिर्च उत्पादक खरगोन जिले के कसरावद कस्बे में शनिवार और रविवार को किया गया. इसमें हजारों किसानों के साथ वैज्ञानिकों, प्रसंस्करण उद्योग के नुमाइंदों और निर्यात विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया. कालीदुराई ने यह भी बताया कि निमाड़ अंचल में उगायी जाने वाली मिर्च की देशी किस्मों को बचाने के लिये जीन बैंक बनाया जायेगा.

सरकारी आंकड़ों पर एक नजरसरकारी आंकड़ों के मुताबिक सूबे में फिलहाल सालाना मिर्च उत्पादन करीब 2.18 लाख मीट्रिक टन के स्तर पर है. इसमें निमाड़ अंचल के पांच जिलों-खरगोन, धार, खंडवा, बड़वानी और अलीराजपुर का 54,451 मीट्रिक टन मिर्च उत्पादन शामिल है. यानी सूबे के कुल मिर्च उत्पादन में अकेले निमाड़ अंचल की भागीदारी 25 प्रतिशत है.

कृषि के जानकारों ने बताया कि गुजरे सालों के दौरान निमाड़ अंचल में किसानों के खासकर कपास की खेती की ओर मुड़ने के चलते मिर्च के रकबे में कमी आयी है. इसके अलावा, मिर्च के पौधों पर घातक विषाणुओं के हमले से फसल बर्बाद होने के खतरे से भी किसान इस मसाला फसल की खेती के प्रति सशंकित रहते हैं. अधिकारियों ने बताया कि मिर्च की फसल को विषाणुजनित रोगों के खतरे से बचाने की रणनीति बनाने के लिये विशेषज्ञों की एक समिति गठित की गयी है. यह समिति प्रदेश सरकार को 15 दिन में विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी.

Sources:-News18

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