छत्तीसगढ़ सरकार ने कोटा से छात्रों को लाने के लिए किये 75 बस रवाना , बिहार के बेटों – बेटियों का क्या होगा ?

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राजस्थान के कोटा में फंसे छत्तीसगढ़ के छात्रों को वापस लाने के लिए शुक्रवार को 75 बसों को रवाना किया गया। बता दे कोटा से छतीसगढ़ के छात्रों को विशेष सुविधा के साथ लाया जा रहा हैं। बसों के साथ एम्बुलेंस, डॉक्टरों का टीम , पुलिस और अधिकारियों के टीम को भी रवाना किया गया हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को यहां बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर राजधानी रायपुर के पुलिस परेड मैदान से राजस्थान के कोटा में लॉकडाउन के दौरान फंसे छात्र-छात्राओं को लाने 75 बसों को रवाना किया गया।आपको बता दे कि अधिकारियों ने यह भी बताया कि रायपुर से कोटा की दूरी बहुत अधिक है, इसलिए छात्र-छात्राओं के भोजन की व्यवस्था का भी ध्यान रखा गया हैं।

अधिकारियों ने बताया कि सभी बसों को सेनेटाईज किया जाएगा। छात्र-छात्राओं को बसों में सामाजिक दूरी के आधार पर बैठाया जाएगा और एक बस में निर्धारित क्षमता से आधी सीटों में छात्र-छात्राओं को बिठाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि कोटा से छत्तीसगढ़ के लगभग 1500 छात्र-छात्राओं को वापस लाया जा रहा हैं। कोटा से आने वाले छात्र-छात्राओं के लिए लॉकडाउन के नियम और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी परामर्श के पालन का भी ध्यान रखा जाएगा। इसके तहत उन्हें पृथक-वास में रखा जाएगा और उनके स्वास्थ्य परीक्षण के बाद बच्चों को घर जाने की अनुमति दी जाएगी।

साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछले दिनों केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह से छत्तीसगढ़ के छात्रों को कोटा से वापस लाने के संबंध में आग्रह किया था। मुख्यमंत्री बघेल लॉकडाउन के दौरान अन्य राज्यों में फंसे श्रमिकों को सभी आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें छत्तीसगढ़ वापस लाने के संबंध में प्रयास कर रहे हैं।

एक तरफ छतीसगढ़ सरकार विशेष सुविधा के साथ कोटा में फंसे राज्य के छात्रों को बुला रही हैं वहीं दुसरी ओर कोटा में फंसे बिहार के बेटा और बेटी सरकार से लगातार गुहार लगा रहे हैं लेकिन अभी तक उन्हे संकट से नहीं निकाला गया। आपको बता दे कि कोटा में बिहार के लगभग 1500 बेटा-बेटी लॅाकडाउन के दौरान कोटा में फंसे हुए हैं।इन बच्चों ने कई दिनों लगातार सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि लेकिन इनकी किसी ने नहीं सूनी।

बता दे कि कोटा में फंसे बिहार के बच्चे अब उपवास के जरिये सरकार से अपील कर रहे हैं।ताकि भी दुसरे राज्य की तरह कोटा से निकालकर घर पहुंचाया जाएं।बता दे इसके छतीसगढ़ के साथ- साथ उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों ने विशेष सुविधा के साथ अपने राज्यों के बच्चों को घर पहुंचा चुकी हैं।वहीं पिछले दिनों बीजेपी विधायक अनिल सिंह अपनी बेटी और पत्नी को कोटा से निजी वाहन के द्रारा ले आए जिसके लिए पास नवादा के एसडीएम ने निर्गत किया था।

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