आस्था और विश्वास का महापर्व छठ शुरू होने में अब केवल 12 दिन शेष रह गए हैं, बिहार में जगह – जगह अभी से छठ के गीत लोगों के कानों में सुनाई देने लगें हैं. जो लोग अपने घर से बाहर दूसरे महानगरों में रोजी – रोजगार के लिए रहते हैं वह अपने घर आने के लिए तैयारी में जुट गए हैं.

छठ को बिहार में महापर्व कहा गया है. बिहार का ये महापर्व केवल बिहार – यूपी तक नहीं सीमित रहा है बल्कि देश – दुनिया के कोने में फैले बिहारी इसे सात समंदर पार भी उतनी आस्था के साथ मनाते हैं जितना बिहार में मनाया जाता है. गल्फ देशों के साथ सिंगापुर, अमेरिका व मॉरीशस समेत कई देशों में भी लोग छठ पर्व मनाते हैं. बिहार के अंबिका नगर, मोतिहारी के अनिल कुमार दोहा-कतर में कतर एयरवेज में एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर हैं. अनिल कहते हैं, नौकरी की व्यस्तता के कारण पिछले दो साल से मैं परिवार के साथ छठ पूजा के अवसर घर नहीं जा पा रहा हूं.

लेकिन, कतर में ही रहनेवाले भारतीय खासकर बिहार और यूपी से आनेवाले लोगों के साथ हम इस पर्व को उल्लास व श्रद्धा के साथ मनाते हैं. पर्व के दिन हमलोग घर की छत पर ही व्रती के लिए सारी व्यवस्था करते हैं. अनिल की पत्नी कुमारी जया इस पर्व के दौरान व्रत रखती हैं. जया कहती हैं, छठ के मौके पर गांव की याद काफी आती है. गांव के लोगों में एक साथ समूह बना कर छठ घाट पर जाने का उत्साह ही कुछ अलग होता है. लेकिन, अब धीरे-धीरे कतर में भी भारतीय मूल के लोग जो छुट्टी के कारण गांव नहीं जा पाते हैं, यहीं उल्लास के साथ छठ पर्व मनाते हैं. कतर के कई मुहल्लों में इस पर्व पर लोग अपने घरों की छत पर ही मित्रों के साथ जुट कर अपनी यादों को जीवंत करते हैं.

छठ पूजा मुख्य रूप से सूर्यदेव की उपासना का पर्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार छठ को सूर्य देवता की बहन हैं। मान्यता है कि छठ पर्व में सूर्योपासना करने से छठ माई प्रसन्न होती हैं और घर परिवार में सुख शांति व धन धान्य से संपन्न करती हैं।

कब मनाया जाता है छठ पूजा का पर्व

सूर्य देव की आराधना का यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है. चैत्र शुक्ल षष्ठी व कार्तिक शुक्ल षष्ठी इन दो तिथियों को यह पर्व मनाया जाता है. हालांकि कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाये जाने वाला छठ पर्व मुख्य माना जाता है. कार्तिक छठ पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व को छठ पूजा, डाला छठ, छठी माई, छठ, छठ माई पूजा, सूर्य षष्ठी पूजा आदि कई नामों से जाना जाता है.

क्यों करते हैं छठ पूजा

छठ पूजा करने या उपवास रखने के सबके अपने अपने कारण होते हैं लेकिन मुख्य रूप से छठ पूजा सूर्य देव की उपासना कर उनकी कृपा पाने के लिये की जाती है. सूर्य देव की कृपा से सेहत अच्छी रहती है. सूर्य देव की कृपा से घर में धन धान्य के भंडार भरे रहते हैं। छठ माई संतान प्रदान करती हैं. सूर्य सी श्रेष्ठ संतान के लिये भी यह उपवास रखा जाता है. अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिये भी इस व्रत को रखा जाता है.

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