छठ पर घर आने की जद्दोजहद, डबल भाड़ा देकर बसों में ठूस-ठूसकर पहुंच रहे प्रवासी मजदूर

खबरें बिहार की

छठ पूजा पर बिहार के प्रवासियों को घर आने के लिए काफी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। साधनों के अभाव में प्रवासी लोग डेढ़ से दोगुना भाड़ा देकर बसों के अंदर घुस कर या फिर छतों पर सवार होकर अपने घरों को आ रहे हैं। हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली, कश्मीर, गुजरात आदि जगहों से रोजाना सैकड़ों की संख्या में लोग जैसे तैसे घर लौट रहे हैं।

इन प्रवासी मजदूरों का कहना है कि ट्रेन में ‘नो रूम’ की स्थिति में चल रही है। प्रीमियम टिकट तीन गुना से चार गुना ज्यादा दामों पर मिल रहे हैं। आम लोगों को टिकट उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। दूसरे राज्यों से रोजाना बिहार के लिए बड़ी संख्या में बसों का परिचालन भी नहीं होता है। ऐसे में घर आने के लिए की मजबूरी में प्रवासी मजदूर या तो बसों को रिजर्व कर या फिर जैसे तैसे उनमें ठुसकर अपने घर आ रहे हैं।

आलम यह है कि प्रवासी मजदूरों को घर आने के लिए डेढ़ गुना से 2 गुना अधिक दाम चुकाना पड़ रहा है। वहीं छतों पर सवार होकर आना खतरों से खाली नहीं है। गुजरात से बिहार के पश्चिम चंपारण आ रहे प्रवासी मजदूर सुरेंद्र चौधरी, वीरेंद्र महतो, कृष्णा राम , पहवारी यादव आदि का कहना है कि वे गुजरात से बिहार के लिए सीधे तौर पर बसों का परिचालन नहीं है। ऐसे में भी करीब तीन से चार बसों को विभिन्न शहरों से  बदल कर बिहार पहुंचे हैं। एक ओर जहां समय अधिक लग रहा है वहीं दूसरी ओर बस वाले भाड़ा भी डबल ले रहे हैं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.