chhath mumbai

1993 में मुंबई में शुरू हुआ था छठ, वहां छठ पूजा करने के लिए करना पड़ा था आंदोलन

आस्था

मुम्बई में जुहू चौपाटी के समुद्र तट पर अब बहुत धूमधाम से छठ पूजा का आयोजन होता है। लेकिन इसकी शुरुआत बहुत मुश्किल से हुई थी। मुम्बई में छठ पूजा शुरू करने के लिए बिहार के लोगों को आंदोलन करना पड़ा था।

कई लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था। लेकिन इस मांग के आगे बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) को झुकना पड़ा और पूजा की इजाजत मिली। बिहार के छठ पूजा को अब कई राज्यों में महत्व मिल रहा है।

पहले छठ पूजा के मौके पर सिर्फ बिहार में ही सरकारी छुट्टी रहती थी। लेकिन अब कई राज्यों में अवकाश दिया जाने लगा है। केन्द्र सरकार ने 2011 में, दिल्ली सरकार ने 2014 में, यूपी सरकार ने 2015 में और पश्चिम बंगाल सरकार ने 2016 में छठ पूजा पर सार्वजनिक अवकाश देने की शुरुआत की है।

मुम्बई में छठ पूजा शुरू करना आसान नहीं था। 1993 में मुम्बई के कुछ बिहारी लोगों ने छठ पूजा करने का फैसला लिया। इसके अगुआ बने बिहार के रहने वाले मोहन मिश्र। मोहन मिश्र की वृद्ध मां मुम्बई आयीं थीं। उनके कहने पर मोहन मिश्र ने छठ पूजा करने का विचार किया। उन्होंने इस मामले में कुछ और बिहारी लोगों से बात की।

सभी लोगों ने तय किया किया कि जुहू चौपाटी के समुद्र तट पर छठ पूजा किया जाए। उन्होंने तत्कालीन बम्बई महानगरपालिका के दफ्तर में आवेदन दिया। चौपाटी समुद्र तट के पास की जुहू एयरोड्रम था जहां से पवन हंस के हेलीकॉप्टर उड़ान भरते थे।

महानगर पालिका ने कहा कि जब तक ‘पवन हंस’ से मंजूरी नहीं मिल जाती तब तक इस आवेदन पर कोई विचार नहीं होगा। बहुत भाग-दौड़ के बाद ये मंजूरी मिली तो दूसरी मुश्किलें सामने आ गयी। समुद्र तट पूजा करने के लिए रौशनी का कोई इंतजाम नहीं था। अंधेरे के बीच रात में रहना यहां मुश्किल था।

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बिजली के लिए मोहन मिश्र और उनके साथियों को आंदोलन करना पड़ा। पांच- छह लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार तक कर लिया। उस समय मुम्बई के एक विधायक अभिराम सिंह ने बहुत मदद की थी। उनके पूर्वज बिहार से यहां आये थे। आखिरकार पूजा करने की इजाजत मिली।

बिना बिजली के ही पूजा करने का फैसला हुआ। जुहू चौपाटी समुद्र तट पर एक छोटा घेरा बनाया गया। पाव भाजी बेचने वालों से किराये पर पेट्रोमैक्स लिया गया। 1993 में करीब 60 बिहारी परिवार पहली बार यहां छठ पूजा करने के लिए जुटे।

अब तो मुम्बई में छठ पूजा का बड़ा भव्य आयोजन होता है। जब इसकी लोकप्रियता बढ़ी तो इस आयोजन में नेता भी शामिल होने लगे। बिहार के रहने वाले पत्रकार और नेता संजय निरुपम छठ पूजा के आयोजन से जुड़े। छठ पूजा का अब इतना महत्व बढ़ गया है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी इसमें शामिल होने लगे हैं।

मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस 2016 में छठ पूजा के मौके पर जुहू चौपाटी गये थे और भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया था। मनसे के अध्यक्ष राज ठाकरे जरूर उत्तर भारतीयों और छठ पूजा के आयोजन का विरोध करते रहें हैं लेकिन इसका बिहारी समुदाय पर कोई असर नहीं पड़ता।

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