छठ के दौरान होती है भगवान भास्कर की आराधना, जानें छठ को लोग क्यों कहते हैं माता और क्या है कहानी?

आस्था खबरें बिहार की

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से चार दिनों का महापर्व छठ शुरू हो जाता है. इस दौरान लोग नहाय-खाय करते हैं, खरना करते हैं तथा पूरे नियम-निष्ठा के साथ छठ का महापर्व मानते हैं. छठ के दौरान काफी अलौकिक माहौल होता है तथा बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड सहित कई राज्यों में बड़ी संख्या में लोग छठ का त्यौहार मनाते हैं.

इन राज्यों में छठ पर्व को काफी साफ-सफाई और शुद्धता के साथ मनाया जाता है तथा छठ महापर्व के तीसरे और चौथे दिन लोग भगवान भास्कर को अर्घ्य देते हैं. जल में खड़े रहकर संध्याकालीन और प्रातः कालीन सत्र में भगवान सूर्य को लोग अर्घ्य देकर अपने परिवार के सुख समृद्धि की कामना करते हैं. लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल होता है कि आखिर जब छठ पर्व के दौरान भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया जाता है तो छठ को ग्रामीण इलाकों में छठ माता क्यों कहते हैं. ज्योतिषाचार्य मनोहर आचार्य बताते हैं कि भगवान भास्कर की बहन सविता होने के कारण संध्या काल में लोग उन्हें अर्घ्य देते हैं.

भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री है छठ माता

ज्योतिषाचार्य मनोहर आचार्य बताते हैं कि ऐसी मान्यता है कि छठ देवी भगवान सूर्य देव की बहन है और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए जीवन के महत्वपूर्ण अवयवों में सूर्य व जल की महत्ता को मानते हुए इन्हें साक्षी मानकर भगवान सूर्य की आराधना की जाती है. किसी भी पवित्र नदी या तालाब के किनारे यह पूजा की जाती है. उन्होंने बताया कि षष्ठी मां यानी छठ माता बच्चों की रक्षा करने वाली देवी है. इस व्रत को करने से संतान को लंबी आयु का वरदान भी मिलता है. ज्योतिषाचार्य ने बताया कि छठ व्रत का उल्लेख मार्कंडेय पुराण में भी मिलता है.

 

कुमार कार्तिकेय की पत्नी है देवसेना

ज्योतिषाचार्य मनोहर आचार्य बताते हैं कि सृष्टि की अधिष्ठात्री प्रकृति देवी ने अपने आप को 6 भागों में विभाजित किया है. इनके छठे अंश को सर्वश्रेष्ठ मातृ देवी के रूप में जाना जाता है, जो ब्रह्मा की मानस पुत्री हैं.

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि प्रकृति के मूल के छठे अंश से उत्पन्न होने के कारण वह षष्ठी देवी कहलाती हैं. इनका नाम देवसेना है और यह कुमार कार्तिकेय की पत्नी भी है. इसी कारण लोकाचार के अनुसार छठ पर्व को माता छठ की पूजा और उनकी आराधना के नाम से भी जोड़कर देखा जाता है और इस दिन भगवान भास्कर को भी अर्घ्य दिया जाता है.

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