छपरा के इस गांव में नहीं होती है मां के मूर्ति की पूजा, पिंडी रूप ही यहां है माता का असली स्वरूप, जानें आमी मंदिर की मान्यताएं

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बिहार के छपरा जिले में मां अम्बिका भवानी मंदिर है जो सम्पूर्ण देश का एकमात्र ऐसा शक्तिपीठ है, जहां मां की मिट्टी के पिंडी रूप में पूजा अर्चना की जाती है. मां के मंदिर में किसी प्रकार की मूर्ति नहीं है. यही कारण है कि आज भी आमी गांव के आसपास के गांवों में माता की किसी प्रकार की मूर्ति रखकर पूजा अर्चना नहीं की जाती है. अंबिका भवानी शक्तिपीठ में लोगों की आस्था, भक्ति एवं विश्वास इस कदर कायम है कि नवरात्र में यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचते हैं.

पौराणिक कथाओं एवं सारण गजेटियर के अनुसार अंबिका भवानी मंदिर राजा दक्ष प्रजापति की यज्ञ स्थली पर अवस्थित माना जाता है. यहीं माता सती ने पति भगवान शिव के निरादर से नाराज होकर हवन कुंड में कूदकर आत्मदाह कर लिया था. देवी सती के आत्मदाह करने से क्रोधित होकर भगवान शंकर ने देवी सती का शव हवन कुंड से निकालकर कंधे पर रखा और तांडव नृत्य करने लगे.

पिंड बनाकर इसी स्थान पर हुई वर्षों तक पूजा

प्रलय की आशंका को देखते हुए भगवान विष्णु ने अपने चक्र से सती के शरीर के टुकड़े कर दिए देवी सती के शरीर के टुकड़े जहां गिरे, वह स्थान शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हुआ. कुंड में जलते समय मां सती के शरीर की भस्म युक्त अस्थी ,(यज्ञ स्थली आमी) में ही रह गई थी. यही स्थान अंबिका स्थान आमी के रूप में प्रसिद्ध हुआ. वहीं मार्केण्डय पुराण तथा दुर्गा सप्तशती में वर्णित है कि कालांतर में राजा सूरथ व समाधि वैश्य ने मिट्टी की भागाकार पिंड बनाकर इसी स्थान पर वर्षों तक पूजा की थी. तब देवी ने प्रकट होकर मनचाहा वरदान दिया था

इस मंदिर में वहीं मिट्टी की भगाकार पिंड आज भी विद्यमान है, जिसकी विधि विधान पूर्वक वर्षों से पूजा अर्चना की जा रही है. मंदिर में किसी प्रकार की मूर्ति नहीं है. मंदिर के पुजारी जितेंद्र तिवारी उर्फ दिगंबर बाबा बताते हैं कि यह ऐसा मंदिर है जहां गंगा स्वयं मां के पांव पखारती है उत्तरायण गंगा के तट पर बसे इस मंदिर में गंगा स्वयं मंदिर के अंदर जाकर विराजमान है. एक गोलाकार गड्ढा माता के पिंडी के सामने स्थित है जिसमें गंगा स्वयं विराजती है और उसमें हाथ डालकर मन्नत मांगने पर मन्नत पूरी होती है. लोगों का कहना है कि इस गड्ढे का पानी कभी नहीं सूखता.

 

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