चौबीसों घंटे मिलेगी बिजलीः सरकार कर रही ये काम, सफलता मिली तो साकार होगा सपना

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राज्य में 24 घंटे बिजली देने के लिए पावर सब-स्टेशनों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। पहले से बने सब-स्टेशनों में लगे पुराने उपकरण बदले जाएंगे। अगर कहीं सवा तीन एमवीए या पांच एमवीए के पावर ट्रांसफॉर्मर होंगे तो वहां बदलकर 10 एमवीए का लगाया जाएगा। कुछ सब-स्टेशनों में नए पावर ट्रांसफॉर्मर भी लगाए जाएंगे।

कंपनी की योजना के अनुसार, राज्य में 167 पावर सब-स्टेशनों का आधुनिकीकरण व मरम्मतिकरण (आरएंडएम) करने की योजना है। इसके तहत साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के अधीन 51 पावर सब-स्टेशनों का चयन किया गया है। इसी तरह नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड में 116 पावर सब-स्टेशनों का चयन किया गया है। राज्य के ऐसे कई पावर सब-स्टेशन हैं, जहां अब भी सब-स्टेशनों में सवा तीन एमवीए या पांच एमवीए का ही पावर ट्रांसफॉर्मर है। साउथ बिहार में ऐसे 98 और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड में 99 पावर सब-स्टेशनों का चयन किया गया है। इसमें सवा तीन या पांच एमवीए के बदले 10 एमवीए के पावर ट्रांसफॉर्मर लगाए जाएंगे। वहीं कुछ सब-स्टेशनों में पहले से 10 एमवीए के पावर ट्रांसफॉर्मर लगे हुए हैं लेकिन वह अब अनुपयोगी हो चुका है। ऐसे साउथ बिहार के 28 और नॉर्थ बिहार के 15 पावर सब-स्टेशनों का चयन किया गया है।

जर्जर तार भी बदले जाएंगे

सब-स्टेशन से ट्रांसफॉर्मर तक जाने वाली बिजली के जर्जर तारों को भी बदलने की योजना कंपनी ने बनाई है। इसके तहत 11केवी में साउथ बिहार में 1278 सर्किट किलोमीटर तो नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड में 2410 सर्किट किलोमीटर तार नए लगाए जाएंगे। जबकि 11केवी में ही साउथ बिहार में 5345 सर्किट किलोमीटर तो नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड में 8958 सर्किट किलोमीटर तार बदले जाएंगे। वहीं 33 केवी में साउथ बिहार में 1153 तो नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड में 1564 सर्किट किलोमीटर जर्जर तार बदले जाएंगे। भीड़-भाड़, गली-मोहल्ले या लोगों के घरों के समीप से गुजरने वाले 60 हजार सर्किट किलोमीटर से अधिक बिजली के तारों को कवर किया जाएगा। इसके तहत साउथ बिहार में 41748 सर्किट किलोमीटर तो नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड में 29 हजार 285 सर्किट किलोमीटर तारों को कवर किया जाएगा।

क्यों जरूरी है सब-स्टेशन

बिजली घरों से ग्रिड के माध्यम से सब-स्टेशन तक बिजली आती है। इसके बाद फीडर होते हुए ट्रांसफॉर्मर के माध्यम से लोगों के घरों तक बिजली आती है। आंधी-पानी हो या अधिक लोड, सब-स्टेशनों पर अधिक भार होता है। एक सब-स्टेशन से एक प्रखंड को बिजली आपूर्ति की जाती है। ऐसे में अगर तकनीकी तौर पर इसे दुरुस्त किया गया तो लोगों को 24 घंटे बिजली देने में सुविधा होगी।

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