सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण 27 जुलाई को, पूर्णिमा भी इसी दिन, चांद का रंग होगा लाल , हुईं विनाश की भविष्यवाणियां

जानकारी

नई दिल्ली। 27 जुलाई को सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण दिखाई देगा। ये ग्रहण रात 11.54 बजे से शुरू होकर रात 3.49 बजे खत्म होगा। 3.55 घंटे लंबे इस ग्रहण का सूतक 27 जुलाई की दोपहर 2.54 बजे से ही लग जाएगा। ये ग्रहण अपने आप में काफी खास है क्योंकि ग्रहण वाले दिन गुरु पूर्णिमा भी है।

ये पूर्ण चंद्रग्रहण होगा.

ये पूर्ण चंद्रग्रहण होगा जो कि 27 जुलाई को रात्रि में 11 बजकर 54 मिनट पर प्रारंभ होकर 3 बजकर 49 मिनट पर समाप्त होगा। ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटा 55 मिनट होगी। ये अंटाकर्टिका, ऑस्ट्रेलिया, रूस, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका के कुछ इलाकों में दिखेगा।

क्या होता है चंद्रग्रहण

चंद्रग्रहण वो खगोलीय स्थिति है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सरल रेखा में होते हैं चंद्रग्रहण केवल पूर्णिमा को घटित हो सकता है। चंद्रग्रहण का प्रकार और अवधि चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करते हैं।



‘ब्‍लडमून’

जुलाई के चंद्रग्रहण के लिए कहा जा रहा है कि इस दिन ‘ब्‍लडमून’ दिखाई देगा। मालूम हो कि चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी की छाया की वजह से धरती से चांद काला दिखाई देता है, इसी चंद्रग्रहण के दौरान कुछ सेकंड के लिए चंद्रमा पूरी तरह लाल भी दिखाई देता है, इसे ब्लड मून कहते हैं।

ग्रहण विनाशकारी साबित हो सकता है

पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण का प्रभाव अच्छा नहीं माना जाता है। करीब 100 साल बाद पूर्णिमा पर आने वाला ग्रहण विनाशकारी साबित हो सकता है क्योंकि ऐसा कहा जा रहा है कि आषाढ़ मास में आने वाला ये ग्रहण भूकंप, चक्रवात, आंधी, तूफान, भूस्खलन को दावत दे सकता है।

सूतक से पहले ही गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाना श्रेष्ठ

पंडितों का कहना है कि ग्रहण के सूतक से पहले ही गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाना श्रेष्ठ है। उधर, मंदिरों में ग्रहण के सूतक से पहले आरती हो जाएगी, शाम की आरती दोपहर में होगी क्योंकि ग्रहण काल में पूजा-अर्चना को शुभ नहीं माना जाता है और इसी वजह से ग्रहण काल में मंदिरों के पट एकदम से बंद हो जाते हैं।

ग्रहणकाल में कुछ खास बातों का ख्याल रखा जाता है



ग्रहण काल में क्या ना करें

ग्रहण काल में भोजन न करें।
गर्भवती स्त्रियां बाहर न निकलें।
सहवास न करें, झूठ न बोलें और ना ही सोए ।
मांस-मदिरा का सेवन ना करें।
प्याज-लहसुन भी ना खाएं।
झगड़ा-लड़ाई से बचें।
पूजा स्थल को स्पर्श ना करें।
इस दौरान शिव और गायत्री का जाप करना चाहिए

ग्रहण खत्म होने के बाद क्या करें
ग्रहण खत्म होते ही स्नानादि कर नए वस्त्र पहनें।
अपने पितरों को याद करें, दान करें।
अगर आसपास कोई धार्मिक स्थल है तो वहां जाएं।
अगर आस-पास घाट हो तो वहां जाकर शिव जी की पूजा करनी चाहिए।

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