बिहार मंडराने लगा बाढ़ का खतरा, बड़ी के बाद अब छोटी नदियों का भी बढ़ा जलस्तर

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बिहार में गंगा, कोसी जैसी बड़ी नदियों के बाद अब छोटी नदियों ने भी अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। नेपाल के साथ झारखंड में हो रही बारिश के बाद बिहार की छोटी नदियों में भी उफान शुरू हो गया है। आधा दर्जन छोटी नदियां खतरे के निशान के ऊपर पहुंच चुकी हैं। 50 से अधिक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

करीब सभी जिलों में वहां स्थानीय रूप से बहने वाली नदियों के जलस्तर में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो रही है। उधर, आधा दर्जन बड़ी नदियां पहले ही खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं। लखनदेई नदी मुजफ्फरपुर में, माही व गंडकी सारण में, घोघा (सुंदर) नदी कहलगांव में खतरे के निशान के ऊपर पहुंच गई है। इनके जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी भी हो रही है। छोटी नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के बाद उनका पानी जगह-जगह फैलने लगा है। खासकर अररिया व सुपौल समेत कोसी व सीमांचल के साथ सारण-चंपारण के इलाके में छोटी नदियों का प्रभाव अधिक दिख रहा है।

नेपाल में बारिश का असर: उधर, पहले ही नेपाल व उत्तर बिहार के नदियों के तराई वाले इलाकोंं में लगातार हो रही बारिश के बाद सभी प्रमुख नदियों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। नदियों में उफान के बाद कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है। कोसी व सीमांचल के बड़े क्षेत्र में बाढ़ का फैलाव हो रहा है। सूबे की आधा दर्जन प्रमुख नदियों गंगा, कोसी, बागमती, कमला बलान, पुनपुन और अधवारा समूह का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर पहुंच चुका है।

इन मध्यम-छोटी नदियों के जलस्तर में हो रही बढ़ोतरीः लखनदेई, माही, गंडकी, घोघा (सुंदर), नून, नून कठाने, बाया, मरहा, कमलाधार, तीसभंवरा, झीम, थोमाने, दाहा, माही, झरही, सिकरहना, पंडई, कारी कोसी, बरंडी, कंकई, पश्चिम मेंची, पूर्वी मेंची, परमान, फरियानी, बकरा, सुरसर, तिलावे, खलखलिया, बटाने, चीरगेरुआ, चंदन, धर्मावती, बनास, मोरहर, जमुने, भल्गू, अपर बदुआ, बरनार, अपर किउल, दुर्गावती, कर्मनाशा, सुअरा, कुहरा, हरोहर, मुहानी, पैमार, गोइठवां, मोहाने, धोबा, नोनाई, चिरैया, पंचाने, तिलैया, सकरी, दरधा, कररुआ, अवसाने, काव आदि।

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