त्रासदी flood

बिहार में बाढ़- पश्चिम चंपारण में बूढ़ी गंडक का गोढ़िया तटबंध टूटा, भयावह स्थिति

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अभी अभी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि पश्चिम चंपारण में बूढ़ी गंडका का गोढ़ीया तटबंध टूट चुका है। इस कारण सैकड़ों गांवों की स्थिति दयनीय बताई जा रही है। जानकारी अनुसार पश्चिम चंपारण सहित आस पास के कई जिले पहले से ही बाढ के चपेट में है। इस तटबंध के टूटने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। उधर स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।

दूसरी ओर गोपालगंज में बाढ़ की स्थिति विकराल हो गई है। डीएम राहुल कुमार ने सेना बुला ली है। सेना की एक टुकड़ी शनिवार को सुबह राहत का मोर्चा संभाल लेगी। बाढ़ से छपरा में भी छह प्रखंडों की 73 हजार की आबादी प्रभावित हो गई है।

गोपालगंज में सिधवलिया प्रखंड के सदौवा तथा उसके बाद बैकुंठपुर प्रखंड के बंगरा में सारण मुख्य तटबंध टूटने से हालात भयावह बने हुए हैं। शुक्रवार को दो दर्जन और गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। सिधवलिया प्रखंड मुख्यालय में पानी फैल जाने से थाना परिसर सहित कई सरकारी कार्यालय परिसर जलमग्न हैं।









बाढ़ के पानी में डूबने से शुक्रवार को पांच लोगों की मौत हो गई। पिछले दो दिन में बाढ़ में डूबकर मरने वालों की संख्या आठ तक पहुंच गई है।

सिधवलिया प्रखंड के निचले इलाके को आगोश में लेते हुए पानी आगे बढ़ रहा है। शनिवार तक जिले के कई और गांवों के बाढ़ की चपेट में आने की आशंका है। सारण मुख्य तटबंध टूटने के बाद अब तक 195 गांव की चार लाख से अधिक आबादी बाढ़ की चपेट में है।









हालांकि, पूर्वी इलाके में गंडक नदी का पानी फैलने से पश्चिमी इलाकों में पानी का दबाव कम हो गया है। कुचायकोट तथा सदर प्रखंड के दर्जनों गांवों में पानी दो फिट घट गया। बंगरा तटबंध टूटने के बाद सारण जिले के पानापुर, मशरख, तरैया तथा अमनौर की तरफ पानी के बहाव से बैकुंठपुर के 40 गांवों में भी पानी घटने से बाढ़ में फंसे ग्रामीणों को कुछ राहत मिली। प्रशासन ने बचाव कार्य तेज कर दिया है। 21 स्थानों पर राहत कैंप खोला गया है। स्वास्थ्य विभाग ने 20 मेडिकल कैंप लगाए हैं। एनएडीआरएफ की टीम भी बचाव कार्य में जुटी हुई है।



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