चमकी बुखार पर सरकार सतर्क, सीएम ने स्वास्थ्य विभाग को दिए ये निर्देश

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एईएस (एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम) की चुनौती से निपटने के लिए अस्पतालों में सभी तरह की तैयारी रखने का निर्देश दिया है। उन्होंने इसके लिए मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, तत्काल दवाओं की उपलब्धता और पीकू वार्ड तैयार रखने को कहा है। इसके पहले मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने एईएस को लेकर जिलों से फीडबैक लिया।

समय पर बीमार बच्चों को पहुंचाएं अस्पताल: CM

एक अणे मार्ग स्थित संकल्प में एईएस को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सीएम ने कहा कि एईएस के प्रति पूरी तरह सतर्कता बरतें। लोगों को एईएस के लक्षणों एवं इलाज के प्रति जागरूक करते रहें। इसके लिए व्यापक रूप से जागरुकता अभियान चलाएं। एईएस से प्रभावित बच्चों को तुरंत अस्पताल तक पहुंचाने की सारी व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी निर्देश सीएम ने दिया। उन्होंने कहा कि पीकू वार्ड को पूरी तरह से तैयार रखें ताकि एईएस प्रभावित बच्चों को ससमय इलाज मिल सके। इसके साथ ही अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

30 हजार आशा कार्यकर्ताओं को दी गयी किट

इससे पूर्व मुख्य सचिव के साथ समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि राज्य के एईएस प्रभावित जिलों में सभी आशा को एक-एक सेट दवा की किट उपलब्ध कराई गई है। इस किट में तीन पारासिटामोल का सीरप और 20-20 ओआरएस का पैकेट उपलब्ध कराया गया है। वहीं, 268 स्वास्थ्य संस्थानों में 566 विशेष किट उपलब्ध कराई गई है। जिसमें इलाज में उपयोग किए जाने वाले उपकरणों को उपलब्ध कराया गया है। मुजफ्फरपुर के सभी अस्पतालों को पांच-पांच सेट और सीतामढ़ी एवं पूर्वी चंपारण में दो-दो सेट किट उपलब्ध कराई गई है।

एईएस के अब तक आठ मामले सामने आये

जनवरी से अब तक एईएस के आठ मामले सामने आ चुके हैं। एसकेएमसीएच में भर्ती हुए इनमें से सात बच्चे ठीक होकर घर जा चुके हैं। जनवरी महीने में एईएस से एक बच्चे की मौत हो चुकी है। एईएस पीड़ित इन बच्चों में से चार मुजफ्फरपुर, दो मोतिहारी, एक सीतामढ़ी और एक अररिया के हैं। सीएस डॉ वीरेंद्र कुमार ने बताया कि एईएस से बचाव के लिए जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है।

इलाज की तैयारियों को लेकर मॉक ड्रिल करें : मुख्य सचिव

राज्य के मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने कहा कि बिहार में एईएस से पीड़ित बच्चों के इलाज को लेकर मॉक ड्रिल किया जाएगा। इसके तहत पीड़ित बच्चों को त्वरित इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने, अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों के उपयोग, डॉक्टरों व कर्मियों की मुस्तैदी को परखा जाएगा। उन्होंने उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को ये निर्देश दिए। बैठक में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण एवं सीतामढ़ी के डीएम भी शामिल हुए। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि संबंधित जिलों में दवा व एंबुलेंसों की पर्याप्त व्यवस्था करें। डॉक्टरों की उपस्थिति सुबह पांच-छह बजे जिला स्तर पर ली जाए। सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में रात्रि पाली में डॉक्टरों की मौजूदगी अनिवार्य की जाए। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को कहा कि गर्मी व उमस बढ़ने के साथ ही एईएस का प्रकोप बढ़ता है, ऐसे में सभी संबंधित 12 जिलों में मॉक ड्रिल कर पीड़ितों के इलाज से जुड़ी तैयारियों की परख करें।

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