चैत में जेठ जैसी धूप ने सुखाया धरती का कलेजा, भोजपुर में फेल होने लगे हैं चापाकल

जानकारी

बिहार में इस बार चैत्र में ही जेठ सी गर्मी महसूस हो रही है और प्यास से हलक सूखने लगे हैं। ऐसे में पानी की दरकार ज्यादा हो रही है, लेकिन तपती गर्मी से हैंड पंप जवाब देने लगे हैं। अबतक भोजपुर जिले के चरपोखरी के विभिन्न गांवों में दो दर्जन से ज्यादा सरकारी हैंड पंप जवाब दे चुके हैं। हालांकि, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग शिकायत मिलने पर टीम भेजकर चापानलों को दुरुस्त करने के दावे कर रहा है। यही हाल घरों में लगे निजी चापाकलों का भी है। निजी चापाकल भी अब बूंद-बूंद पानी देने लगे हैं।

सरकारी आंकड़े के अनुसार प्रखंड में कुल 915 चापाकल लगाए गए हैं। जिनमें, कई चापनल तो काफी दिनों से खराब हैं और उनकी सुध नहीं ली जा रही है। उदाहरण के लिए चरपोखरी प्रखंड कार्यालय परिसर और डाकघर चरपोखरी के समीप में लगाया गया थ्री इंडिया मार्का सरकारी हैंडपंप है, जो कई वर्षो से खराब पड़ा हुआ है। बीमार चापाकल को दुरस्त करने वाला विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

आम लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के दावे सरकारी विभाग द्वारा भले ही किये जाते है लेकिन धरातल पर कुछ और ही देखने को मिल रहा है। शुद्ध पेयजलापूर्ति के लिए विधायक की अनुशंसा पर विभिन्न पंचायतों में थ्रीडी इंडिया मार्का चापाकल लगाया गया था, लेकिन अधिकांश अब बंद पड़े हैं।

सरकारी चापाकल विभागीय उपेक्षा के शिकार

स्थानीय लोग बताते है कि हर घर शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए भले ही नल जल योजना पर कार्य हुआ है, लेकिन यह योजना ज्यादातर कागजों में सिमट कर रह गई है। नल-जल का कार्य पूरा हुआ रहता तो ग्रामीणों को पानी की कमी नही होती। मलौर,चरपोखरी, देकुड़ा समेत कई ऐसे गांव है जहां सरकारी चापाकल खराब पड़े हैं। लोक स्‍वास्‍थ्‍य अभियंत्रण विभाग के कनीय अभियंता दिलीप मंडल ने बताया कि प्रखंड में खराब पड़े चापाकल की जानकारी मिलते ही टीम भेजकर उसकी मरम्मत कराई जाती है। कहीं ऐसी समस्या है तो प्रतिनिधि गण या ग्रामीण विभाग को इसकी सूचना दे सकते हैं, टीम भेजकर चापानल को दुरुस्त कराया जाएगा।

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