सेंट्रल यूनिवर्सिटी अनिश्चितकाल के लिए बंद,प्रोफेसर संजय कुमार की मॉब लिंचिंग के प्रयास की घटना का नया रुख

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मोतिहारी स्थित महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के सोशियोलॉजी के सहायक प्रोफेसर संजय कुमार की मॉब लिंचिंग के प्रयास की घटना ने नया रुख अख्तियार कर लिया है

एक तरफ घायल संजय की लगातार बिगड़ती हालत देख कर रविवार को उन्हें नई दिल्ली के एम्स में रेफर कर दिया गया, वहीं दूसरी तरफ मोतिहारी सेंट्रल यूनिवर्सिटी को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है.

विश्वविद्यालय के कुलपति की ओर से रविवार को जारी एक आदेश में विश्वविद्यालय को 20 अगस्त से अनिश्चितकाल के लिए बंद करने की बात कही गई है. कुलपति का कहना है कि विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं, शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए यह कदम उठाया गया है.

मोतिहारी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के ओएसडी आनंद प्रकाश के दस्तख़त से जारी किए गए इसी आदेश में कहा गया है कि अख़बारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में चल रही ख़बरों से विश्वविद्यालय में परिस्थितियां प्रतिकूल हो गई हैं.

केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम 2009 के अनुसार विश्वविद्यालय का कुलपति सुरक्षा, सौहार्द्र और अनुशासन का माहौल कायम रखने के लिए ऐसे फ़ैसले ले सकता है. विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रहने वालों छात्रों को 20 अगस्त दोपहर दो बजे से पहले हॉस्टल खाली करने के निर्देश दिए गए हैं.

देश में पिछले कुछ समय से भीड़ के उग्र होने के कई मामले सामने आ चुके हैं. प्रोफेसर संजय कुमार पर शुक्रवार पर भी भीड़ ने कथित रूप से हमला बोल दिया था, जिसमें वो गंभीर रूप से घायल हो गए थे.

संजय ने पुलिस को लिखी शिकायत में यह आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने उन्हें घर से खींच कर जान से मारने की कोशिश की. वे उनके फ़ेसबुक पोस्ट का विरोध कर रहे थे और उन्हें ‘चरमपंथी’ बता रहे थे.

पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती संजय कुमार की स्थिति ऐसी है कि वो ठीक से बोल नहीं पा रहे हैं. उनका दाहिनी आंख जख़्मी है. परिजनों को आशंका है कि कहीं उनकी आंख की रोशनी न चली जाए.

‘अस्पताल का रवैया असंवेदनशील’

संजय के साथी प्रोफेसर और मोतिहारी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के शिक्षक संघ के संयुक्त सचिव मृत्युंजय ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है.

बीबीसी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, “अस्पताल के डॉक्टरों का रवैया असंवेदनशील था. कोई पूछने और देखने तक नहीं आ रहा था. सुबह 10 बजे तक कोई डॉक्टर नहीं आया. हमनें बार-बार शिकायत भी की पर सुनने को कोई तैयार नहीं था.”

हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों से इंकार किया है और कहा है कि संजय कुमार का इलाज हर संभव बेहतर किया जा रहा था. परिजनों और दोस्तों के दबाव में उन्हें दिल्ली रेफर किया गया है.

संजय को पटना से दिल्ली लेकर पहुंचे मृत्युंजय को उम्मीद है कि एम्स में उन्हें बेहतर इलाज मिल पाएगा.

 

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