पटना प्रमंडल के प्राइवेट स्कूल अगले सेशन से सात फीसदी से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। पिछले सेशन में भी जिन्होंने इससे ज्यादा बढ़ाया है, अधिक वसूली गई राशि उन्हें एडजस्ट करनी होगी। इससे ज्यादा फीस बढ़ाने की वाजिब वजह बतानी होगी। प्रमंडलीय आयुक्त की अनुमति के बगैर अगर सात फीसदी से अधिक फीस बढ़ाई तो सख्त कार्रवाई होगी।

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस, परिसर के सुरक्षा प्रावधानों और सुविधाओं को लेकर सोमवार को प्रमंडलीय आयुक्त आनंद किशोर ने पटना, नालंदा, भोजपुर, बक्सर, रोहतास व कैमूर जिलों के लिए ऐसे कई निर्देश दिए। सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ प्राइवेट स्कूल संचालकों-प्राचार्यों की बैठक के बाद प्रमंडलीय आयुक्त ने स्कूलों को निर्देश कअनुपालन के लिए मियाद भी तय कर दी है।

फीस बढ़ाने के लिए लेनी होगी अनुमति
निजी स्कूल प्रबंधन सालाना 7% वार्षिक शुल्क ही बढ़ा सकेंगे। 7% से अधिक शुल्क वृद्धि करने के लिए उचित कारण के साथ विस्तृत प्रस्ताव आयुक्त की ओर से गठित समिति में भेजना होगा। वर्ष 2020-21 की फीस वृद्धि के संबंध में 30 नवंबर तक प्रस्ताव देने का निर्देश दिया गया है। क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक के यहां आवेदन जमा करना होगा।

जिन्होंने बढ़ाई, करेंगे समायोजन

जिन स्कूलों ने वर्ष 2019-20 में 7 प्रतिशत से अधिक शुल्क बढ़ाया है, उन्हें बढ़ाने की वजह के साथ 15 दिनों के अंदर पूरी विवरणी में प्रतिवेदन देना होगा। अनावश्यक रूप से शुल्क बढ़ोतरी साबित हुई तो अगले छह माह में राशि एडजस्ट करनी होगी। यानी, अप्रत्यक्ष रूप से शुल्क को बच्चों को वापस करना होगा।

ड्रेस-किताबों के नाम पर नहीं हो लूट 
अभिभावक अपनी मर्जी की दुकान से पुस्तक, कॉपी, ड्रेस आदि खरीद सकेंगे। स्कूल प्रबंधन चिह्नित दुकान से पुस्तक, ड्रेस व अन्य सामग्री खरीदने का दबाव नहीं डालेंगे। पहली बार ऐसी शिकायत पर एक लाख और दूसरी बार में 2 लाख जुर्माना लगेगा। तीसरी बार में स्कूल की संबद्धता रद्द कर दी जाएगी।

वेबसाइट व बोर्ड पर दें हर जानकारी
प्रत्येक स्कूल अपनी वेबसाइट बनाएंगे। इसपर नामांकन फीस, पुनर्नामांकन फीस, विकास शुल्क, मासिक ट्यूशन फीस, वार्षिक फीस, पुस्तक के प्रकाशक का नाम, ड्रेस कलर आदि लिखेंगे। विद्यालय के नोटिस बोर्ड पर भी इसे लिखेंगे। पिछले साल और अगले साल का भी।

सुरक्षा-सुविधा के लिए सख्त ताकीद
स्कूलों में सीसीटीवी कैमरा लगाया जाए। छात्राओं के लिए अलग टॉयलेट की व्यवस्था हो। छात्राओं के टॉयलेट की सफाई करने के लिए महिला सफाईकर्मी ही रखें। छात्राओं की काउंसिलिंग के लिए महिला काउंसलर रखें। गाड़ियां अपनी पार्किंग में रखें। गाड़ियों में फर्स्ट एड बॉक्स जरूर हो। विद्यालय में कार्यरत कर्मियों गार्ड, सफाईकर्मी, अटेंडेंट, पिउन, ड्राइवर के एड्रेस प्रूफ को 15 दिनों के अंदर थाना में जमा कराने का निर्देश दिया गया है। विद्यालय में कार्यरत कर्मियों की जांच पुलिस करेगी ताकि अपराध की आशंका को न्यूनतम किया जा सके।

स्कूल सेवा की बसें हों दुरुस्त, गाना नहीं बजाएं
स्कूल बस में म्यूजिक सिस्टम नहीं होगा। पहले से हो तो हटाने का निर्देश। डीटीओ वाहनों की जांच कराएंगे और इस आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करेंगे। बगैर फिटनेस व अन्य कागजातों के चलने वाले स्कूली वाहनों का परमिट रद्द होगा।

Sources:-Dainik Bhasakar

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