साल भर बाद आज कैबिनेट की प्रत्‍यक्ष बैठक, केंद्रीय कर्मचारियों के DA पर लगी रोक हटाने पर हो सकता है फैसला

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प्रधानमंत्री के आवास पर इस वक्त केंद्रीय कैबिनेट की बैठक चल रही है. इसके बाद आज शाम को पांच बजे मंत्रि परिषद की भी बैठक होगी. आज होने वाली यह बैठक कई मायनों में खास है. कोरोना काल के चलते करीब एक साल बाद प्रधानमंत्री वर्चुअल के बजाए प्रत्‍यक्ष बैठक कर रहे हैं. पीएम मोदी की अध्‍यक्षता में हो रही इस बैठक में मंत्रिमंडल के सभी सदस्य व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हैं. सूत्रों ने बताया कि इससे पहले मंत्रिमंडल की प्रत्यक्ष बैठक पिछले साल अप्रैल के पहले सप्ताह में हुई थी, जब देश में कोरोना वायरस महामारी फैली थी.इस बार मंत्रियों के उनके मंत्रालय के कामकाज के वितरण को लेकर भी बातचीत होगी. मंत्रिमंडल विस्तार के बाद ये दूसरी कैबिनेट और मंत्रिपरिषद की बैठक है.

इसके साथ ही आज होने वाली कैबिनेट की बैठक में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए आज अच्छी ख़बर आ सकती है. कैबिनेट की बैठक में महंगाई भत्ते पर लगी रोक हटाने का फैसला लिया जा सकता है. इसके साथ ही महंगाई भत्ते में 3 फ़ीसदी की बढोत्तरी का भी प्रस्ताव है.

लॉकडाउन के दौरान भी केंद्रीय मंत्रिमंडल की लगभग हर हफ्ते वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नियमित रूप से बैठक होती थी. प्रधानमंत्री शाम चार बजे वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये भी मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे. 7 जुलाई को मंत्रिपरिषद के विस्तार के बाद एक सप्ताह में यह इसकी दूसरी बैठक है. नई मंत्रिपरिषद की बैठक 8 जुलाई को हुई थी. सूत्रों ने कहा कि संसद का आगामी मानसून सत्र मंत्रिपरिषद की बार-बार बैठक बुलाने का एक कारण हो सकता है.

सूत्रों के मुताबिक 19 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले मंत्रिमंडल के सदस्‍यों ने साथ में बैठकर बात करने की बात कही थी. संसद का मानसून सत्र 13 दिन चलेगा. मंत्रालयों में फेरबदल के बाद, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, भूपेंद्र यादव और सर्बानंद सोनोवाल को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति में शामिल किया गया है. पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और हर्षवर्धन अब इसका हिस्सा नहीं हैं.

इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार, किरण रिजिजू और अनुराग ठाकुर को संसदीय मामलों की मंत्रिमंडल समिति का सदस्य बनाया गया है. मंत्रिमंडल की निवेश और विकास पर गठित कैबिनेट समिति में भी फेरबदल किया गया है और अब इसमें पीएम मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, नारायण राणे, ज्योतिरादित्य सिंधिया और अश्विनी वैष्णव शामिल हैं.

दरअसल कोरोना शुरू होने के बाद से महंगाई भत्ते की बढोत्तरी पर रोक लगी हुई है. पिछले साल कोरोना महामारी शुरू होने के बाद अप्रैल के महीने में केंद्रीय कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते की दो किस्तों को जारी करने पर रोक लगा दी थी. चूंकि महंगाई भत्ते की क़िस्त हर छह महीने पर जारी की जाती है. एक बार 1 जनवरी से जबकि दूसरी बार 1 जुलाई से. लिहाज़ा ये रोक खत्म हो गई है, लेकिन इस पर आज कैबिनेट में मुहर लग सकती है.

बढ़ती महंगाई से वस्तुओं के दाम बढ़ते जाते हैं और लोगों के पास मौजूद पैसे की क्रय क्षमता को कम करने लगते हैं. इसका सामना करने के लिए सरकार कर्मचारियों को महंगाई भत्ता देती है ताकि लोग बढ़ते हुए खर्चों का सामना कर सकें और अपनी जरूरत की चीजों को दाम बढ़ने के बावजूद भी खरीद पाएं.

महंगाई भत्ते यानी डीए की कैलकुलेशन के लिए सरकार ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स पर बेस्ड महंगाई दर को आधार मानती है और इसके आधार पर हर दो साल में सरकारी कर्मचारियों का डीए संशोधित किया जाता है.

 

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