कैबिनेट विस्तार से बिहार में मोदी-शाह ने साधा जातीय समीकरण

राजनीति

रविवार को हुए केंद्रीय कैबिनेट के नए विस्तार में ब्राह्मण और राजपूत बिरादरी को तरजीह देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में जातीय समीकरण को संतुलित करने की कोशिश की है। इसके पहले राम विलास पासवान, रामकृपाल यादव और उपेंद्र कुशवाहा के जरिए दलित एवं पिछड़े वर्ग का ख्याल रखा था।

कैबिनेट विस्तार में अश्विनी चौबे को जगह देकर ब्राह्मण को साधने का प्रयास किया। बिहार में जनसंख्या के लिहाज से सवर्णों में ब्राह्मणों की आबादी दूसरे स्थान पर है। साढ़े तीन वर्षों की मोदी सरकार में बिहार के ब्राह्मणों को नुमाइंदगी नहीं मिलने से इस बिरादरी का सरकार और भाजपा संगठन पर काफी दबाव था।

अब जबकि केंद्र सरकार के महज डेढ़ वर्ष का कार्यकाल बचा है, ऐसे में इस बदलाव को काफी अहम माना जा रहा है। बिहार में सवर्णों में नंबर वन आबादी वाले राजपूत बिरादरी के राजीव प्रताप रुड़ी की कैबिनेट से विदाई के बाद अंदरखाने खलबली का माहौल था।

बिहार के सांसदों में वर्तमान में राजपूत समाज से भाजपा के सर्वाधिक छह सांसद हैं। ऐसे में भाजपा ने पूर्व नौकरशाह आरके सिंह को ऊर्जा मंत्रालय जैसे अहम महकमे का स्वतंत्र प्रभार देकर इस बिरादरी को संपूर्ण रूप से साधने की कोशिश की है।

बिहार में ब्राह्मण बिरादरी से निलंबित सांसद कीर्ति झा आजाद समेत तीन सांसद हैं, लेकिन अभी तक किसी को केंद्रीय कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया था। अब अश्विनी चौबे के रूप में सबसे वरिष्ठ सांसद को पार्टी ने राज्य में उनके पुराने अनुभव को तवज्जो देते हुए स्वास्थ्य राज्य मंत्री के पद से नवाजा है।

अहम बात यह है कि इस पहल से भाजपा को दक्षिण के राज्यों में भी चुनावी फायदा मिलने का अनुमान है। इसी तरह बिहार में सवर्णों की आबादी में तीसरे पायदान पर भूमिहार बिरादरी के गिरिराज सिंह को भी तरक्की मिली है। गिरिराज को मोदी कैबिनेट में तीसरे विस्तार के बाद अब सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार दिया गया है।

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