बक्सर पहुंचे स्विट्जरलैंड और जर्मनी के पर्यटक, बोले – ‘यहां के लोग अच्छे, पर शहर में शोर बहुत है’

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गंगा के रास्ते बक्सर में पर्यटन गतिविधियों के विकास की उम्मीद एक बार फिर जाग गई है। देश में निर्मित आलीशान और बड़े रिवर क्रूज एमवी गंगा विलास पर सवार स्विट्जरलैंड और जर्मनी के लगभग 32 पर्यटक शनिवार की सुबह बक्सर पहुंचे, तो उनकी प्रतिक्रिया आशा जगाने वाली थी। इन पर्यटकों ने लगभग दो घंटे बक्सर में गुजारे।

ईस्ट इंडिया कंपनी और तीन भारतीय शासकों की संयुक्त सेना के बीच युद्ध के गवाह रहे कटकौली गांव में बने ऐतिहासिक युद्ध स्मारक को देखा। इन पर्यटकों ने सीताराम उपाध्याय संग्रहालय का भी भ्रमण किया। इसके बाद गाजीपुर के रास्ते वाराणसी के लिए रवाना हो गए। गंगा विलास वाराणसी से अगले हफ्ते दुनिया की सबसे बड़ी रिवर क्रूज यात्रा पर निकलने वाली है तब यह क्रूज और अधिक पर्यटकों को लेकर बक्सर पहुंचेगी।

स्विट्ज़रलैंड के हैंस काउफैन, जेनेवियर, मारग्रेट और जर्मनी की बिया ने बताया कि बक्सर आना मजेदार रहा। यहां के लोग अच्छे और मिलनसार हैं। यहां घूमना अच्छा लगा। हालांकि, यहां शोर काफी अधिक है। विदेशी पर्यटकों का काफिला सुबह करीब आठ बजे बक्सर पहुंचा। इन पर्यटकों ने स्थानीय मार्केट की भी सैर की। कुछ पर्यटकों ने ठंड के कपड़े स्थानीय दुकानों से खरीदे।

सीताराम उपाध्याय संग्रहालय में पुराने जमाने के औजार, मूर्तियां और हथियार देखकर वे काफी रोमांचित थे। पर्यटकों की शिप के लिए रामरेखा घाट पर जेटी लगाकर प्लेटफार्म बनाया गया था। यहीं से उनका बक्सर भ्रमण शुरू हुआ। लंबे अरसे के बाद शहर में विदेशी पर्यटकों को देखकर स्थानीय लोग भी खूब उत्साहित थे। पर्यटकों को देखने के लिए कड़ी ठंड में भी घाट पर काफी लोग जुट गए थे।

दो दिनों की देरी से पहुंचा गंगा विलास

गंगा विलास क्रूज को गुरुवार को ही बक्सर पहुंचना था। दरअसल, यह शिप वाराणसी से बक्सर, पटना, कोलकाता के रास्ते बांग्लादेश होकर पुनः भारत में प्रवेश करते हुए असम के डिब्रूगढ़ तक जानी है। इस यात्रा का औपचारिक शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे। यात्रा की शुरुआत के लिए यह क्रूज फिलहाल कोलकाता से वाराणसी जा रही है। पूर्व सूचना के मुताबिक क्रूज को इस रूट में एक तरफ से बिना यात्रियों के जाना था। लेकिन, क्रूज को वाराणसी तक की यात्रा के लिए पर्यटक मिल जाने पर निर्धारित कार्यक्रम में बदलाव किया गया।

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