कल तक जो लोग उड़ाते थे मजाक, आज इसके हौसले को कर रहे सलाम

कही-सुनी

मुश्किलें आती हैं। लेकिन खुद पर विश्वास हमें उन सारी बाधाओं से निकाल देता है। अगर आपके पास हिम्मत है तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। ये कहना है जमुई के सबलबीघा गांव की निभा का। निभा जब 13 साल की थी तब उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। एक रोड ऐक्सीडेंट में उन्होंने अपने पिता को हमेशा के लिए खो दिया।

इस घटना ने घरवालों को तोड़ कर रख दिया। पिता का साया उठने से परिवार के सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी हो गई। परिवार के लिए ये दौर बहुत ही बुरा था। ऐसी स्थिति में जब बड़े-बड़ों के हौसले टूट जाते हैं। तब छोटी सी निभा ने बड़ी हिम्मत का परिचय दिया और घरवालों का सहारा बनने की ठानी। अपने पैरों पर खड़े होने के लिए वो छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाने लगीं। लेकिन समस्या यहीं खत्म नहीं हुई। समाज के ताने अभी निभा का इंतजार कर रहे थे।

कई लोगों ने उनके मुंह पर तो कईयों ने पीठ पीछे मजाक उड़ाया। कुछ ने तो बहुत ही दिल तोड़ने वाले ताने दिए। लेकिन फिर भी निभा ने अपने पैर पीछे नहीं खींचे। वो मेहनत से अपना काम करती रही। धीरे-धीरे उनके इस काम को आस-पड़ोस के लोगों ने भी सराहा और मदद की।

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