कलश स्थापना के साथ ही 25 मार्च से चैत्र नवरात्रि शुरु हो गई है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है. नवरात्र के पहले दिन जहां मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जाती है वहीं दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है. इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी. इस कारण इन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना जाता है. मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं.

मां ब्रह्मचारिणी इनको ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है. कठोर साधना और ब्रह्म में लीन रहने के कारण भी इनको ब्रह्मचारिणी कहा गया है. विद्यार्थियों के लिए और तपस्वियों के लिए इनकी पूजा बहुत ही शुभ फलदायी होती है. जिनका स्वाधिष्ठान चक्र कमजोर हो उनके लिए भी मां ब्रह्मचारिणी की उपासना अत्यंत अनुकूल होती है.

क्या है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि?

– मां ब्रह्मचारिणी की उपासना के समय पीले अथवा सफेद वस्त्र धारण करें.

– मां को सफेद वस्तुएं अर्पित करें, जैसे- मिसरी, शक्कर या पंचामृत.

– ज्ञान और वैराग्य का कोई भी मंत्र जपा जा सकता है.

– वैसे मां ब्रह्मचारिणी के लिए “ॐ ऐं नमः” का जाप करें.

– जलीय आहार और फलाहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए.

स्वाधिष्ठान चक्र के कमजोर होने पर क्या होता है?

– व्यक्ति के अंदर अविश्वास रहता है.

– ऐसे लोगों को हमेशा बुरा होने का भय होता है.

– ऐसे लोग कभी कभी काफी क्रूर होते हैं.

– साथ ही कभी कभी बहुत कामुक होते हैं.

स्वाधिष्ठान चक्र को मजबूत करने के लिए क्या करें?

– रात्रि को सफेद वस्त्र धारण करें.

– सफेद आसन पर बैठें तो उत्तम होगा.

– इसके बाद देवी को सफेद फूल अर्पित करें.

– पहले अपने गुरु का स्मरण करें.

– इसके बाद आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाएं.

– ध्यान के बाद देवी या अपने गुरु से स्वाधिष्ठान चक्र को मजबूत करने की प्रार्थना करें.

Sources:-Punjab Kesari

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