बीपीएससी के इतिहास में पहली बार वायरल हुआ प्रश्नपत्र, आयोग को करोड़ों का नुकसान; छात्रों को करना होगा तीन महीने इंतजार

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बिहार लोक सेवा आयोग के इतिहास में पहली बार 67वीं संयुक्त परीक्षा का प्रश्नपत्र वायरल हुआ है। हालांकि आयोग के स्तर पर परीक्षा को कदाचार मुक्त कराने के लिए हर तरह का इंतजाम किये गये थे। एक दिन पहले आयोग के अध्यक्ष आरके महाजन ने सभी जिलों के डीएम से बात की थी। परीक्षा को लेकर सख्त निर्देश दिए गए थे। बीपीएससी 67वीं परीक्षा का प्रश्नपत्र सुबह 11 बजे ही काफी तेजी से टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर वायरल होना शुरू हो गया था। उसके बाद धीरे-धीरे यह मामला यूट्यूब पर पहुंच गया। 11:30 बजे के बाद अधिकारी हरकत में आए और जांच के आदेश दिए गए। इसके 3 घंटे बाद ही परीक्षा को रद्द कर दिया गया।

छात्र पल-पल की जानकारी लेते रहे 

परीक्षा के लिए पटना, पूर्णिया, दरभंगा, मधेपुरा, सहरसा, मुजफ्फरपुर सहित कई जिलों में सेंटर बनाए गए थे। परीक्षा खत्म होने के तुरत बाद पेपर वायरल होने की खबर फैली। शाम साढ़े सात बजे बीपीएससी ने परीक्षा को रद्द करने का आदेश जारी कर दिया। तीन घंटे की जांच में ही प्रश्नपत्र वायरल को सही पाया गया। इधर, प्रश्नपत्र वायरल होने की सूचना के बाद परीक्षा रद्द होने की आशंका के बीच घर लौटते समय छात्र रास्ते में परीक्षा से संबंधित पल-पल की जानकारी विभिन्न माध्यमों से लेते रहे। जैसे ही उन्हें परीक्षा रद्द किए जाने की सूचना मिली, वह परेशान हो गए।

पांच लाख अभ्यर्थियों को हुई परेशानी

पांच लाख अभ्यर्थियों को हुई परेशानी

पीटी रद्द होने के बाद पांच लाख छात्रों को झटका लगा है। खासकर दूरदराज से परीक्षा देने आए छात्रों को आर्थिक रूप से तो नुकसान हुआ ही, मानसिक तौर पर भी वे परेशान हुए। सैकड़ों छात्र तो दिल्ली और उत्तर प्रदेश से परीक्षा देने आए थे। उत्तर प्रदेश से आए अभ्यर्थी राजा दीपेंद्र प्रताप ने कहा कि अभी घर भी नहीं लौटा कि परीक्षा रद्द होने की सूचना सोशल मीडिया से मिली। दिल्ली से आए अमित कुमार, राकेश कुमार और श्रेया कुमारी ने कहा कि इस तरह से बिहार की बदनामी हो रही है। इतनी बड़ी परीक्षा का पेपर लीक होना कहीं न कहीं प्रशासन की व्यावस्था में गड़बड़ी को दर्शाता है।

आयोग को करोड़ों रुपये का नुकसान 

परीक्षा रद्द होने से बिहार लोक सेवा आयोग को करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। परीक्षा के लिए प्रश्न पत्र, ओएमआर शीट आदि छपवाने में काफी खर्च होता है। सभी परीक्षा केंद्रों को व्यवस्था के लिए अच्छी-खासी राशि दी जाती है। साथ ही परीक्षा ड्यूटी में लगाए गए तमाम अधिकारी से लेकर कर्मियों को परीक्षा ड्यूटी के लिए राशि उपलब्ध करायी जाती है। राज्यभर में 1083 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। एक अनुमान के मुताबिक आयोग को 10 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है।

परीक्षा के लिए छात्रों को करना होगा इंतजार 

अब पांच लाख छात्रों को परीक्षा के लिए इंतजार करना पड़ेगा। परीक्षा में कम से कम तीन माह का समय लगेगा। अभी पूरी प्रक्रिया की जांच होगी। जांच के बाद ही आयोग आगे की परीक्षा के लिए तिथि जारी करेगा। जबतक जांच नहीं होगी परीक्षा भी संभव नहीं है।

बीपीएससी 67वीं की पीटी की तिथि चार बार बढ़ी थी

बिहार लोक सेवा आयोग ने 67वीं प्रारंभिक परीक्षा की तिथि में पूर्व में चार बार बदलाव किया था। यह परीक्षा पहले 26 दिसंबर 2021 होनी थी। इसे टाल कर 23 जनवरी 2022 कर दिया गया। परीक्षा केंद्र मिलने में दिक्कत के कारण इसकी तिथि 30 अप्रैल की गई। इस दिन जवाहर नवोदय विद्यालय की परीक्षा होनी थी, इसलिए बीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा की तिथि फिर बढ़ा दी गई और इसे 7 मई कर दिया गया। इस दिन कोई बड़ी परीक्षा होने की वजह से फिर इसकी तिथ बढ़ाकर 8 मई कर दी गई।

छह लाख ने किया था आवेदन

67वीं पीटी के लिए 6 लाख दो हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इसमें शामिल होने के लिए पांच लाख 18 हजार ने एडमिड कार्ड डाउनलोड किया। लेकिन सबसे अधिक छात्रों वाली इस परीक्षा को प्रश्नपत्र वायरल होने के कारण रद्द करना पड़ा।

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