बोधगया में महाबोधि मंदिर ही नहीं, घूमने-फिरने के लिहाज से ये जगह भी है बेहद खास

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बोधगया बिहार के गया जिले में महाबोधि मंदिर के रूप में महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थ स्थल है। कहते हैं यहीं पर बोधि वृक्ष के नीचे गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। यह जगह अब यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों में से एक है। जापान और चीन सहित कई देशों से बौद्ध तीर्थयात्री यहां हर साल आते हैं। नेरंजना नदी के पास स्थित बोधगया को पहले उरुवेला के नाम से जाना जाता था। 18वीं शताब्दी तक इसे संबोधि वज्रासन या महाबोधि के नाम से भी जाना जाता था। यह दुनिया के चार महत्वपूर्ण बौद्ध स्थलों में से एक है जिसमें शामिल हैं कुशीनगर, लुंबिनी और सारनाथ।

महाबोधि मंदिर

महाबोधि मंदिर को महान जागृति मंदिर भी कहा जाता है। यह बौद्ध मंदिर वह स्थान है जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। भगवान बुद्ध को भगवान विष्णु के 9वें अवतार के रूप में माना जाता है जो पृथ्वी पर आए थे। महाबोधि मंदिर 4.8 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला है और 55 मीटर लंबा है। बोधि वृक्ष मंदिर के बाईं ओर स्थित है और माना जाता है कि यह वास्तविक वृक्ष है जिसके नीचे भगवान गौतम बुद्ध ने ध्यान किया और उन्हें ज्ञान मिला जिसके बाद उन्होंने जीवन के लिए अपना दर्शन रखा। मूल मंदिर का निर्माण सम्राट अशोक ने किया था।

ग्रेट बुद्ध स्टैच्यू

भगवान बुद्ध की यह प्रतिमा भारत में सबसे ऊंची है और 1989 में चौदहवें दलाई लामा द्वारा स्थापित की गई थी। यहां एक विशाल कमल पर विश्राम करने वाला एक ध्यानी बुद्ध हैं जिसे जटिल नक्काशीदार बलुआ पत्थर और लाल ग्रेनाइट का उपयोग से बनाया गया है।

तिब्बती रिफ्यूजी मार्केट
शॉपिंग लवर्स के लिए ये मार्केट जन्नत है। यहां सर्दियों के वस्त्र, हस्तशिल्प और स्मृति चिन्ह आदि की वैराइटी मौजूद है।

बोधि वृक्ष

पटना के दक्षिण में 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बोधि वृक्ष बौद्ध धर्म के सबसे प्रमुख स्थानों में से एक है। राजकुमार सिद्धार्थ गौतम ने यहां ज्ञान प्राप्त किया और फिर वो दुनियाभर में भगवान बुद्ध के रूप में जाने गए। ऐसा माना जाता है कि राजकुमार सिद्धार्थ को सात दिनों तक इसी पेड़ के नीचे बैठकर ध्यान करना पड़ा था। 7वीं शताब्दी में बोधि वृक्ष के पास एक छोटा मंदिर भी बनाया गया था।

थाई मठ

सोने की उत्कृष्ट टाइलों से ढकी अपनी घुमावदार छत के लिए प्रसिद्ध थाई मठ में बुद्ध की एक कांस्य की प्रतिमा है। बौद्ध अनुयायियों के लिए ये जगह खास महत्व रखती है और बौद्ध धर्मांवलंबी यहां दर्शन के लिए आते हैं।

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