बिहार के खून से महाराष्ट्र में लोगों की जान बचाई जाएगी,बिहार रेडक्रॉस एवं रिलायंस हेल्थकेयर के बीच समझौता

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मुम्बई में भले बिहारियों को समय समय पर मनसे एवं अन्य पॉलिटिकल पार्टी द्वारा टार्गेट किया जाता रहा हो लेकिन बिहार सदैव से मराठियों का शुभ चिंतक रहा है। ताजा अपडेट के अनुसार बिहार के खून से महाराष्ट्र में लोगों की जान बचाई जाएगी। इसके लिए बिहार रेडक्रॉस एवं रिलायंस हेल्थकेयर के बीच एक समझौता किया गया है। बिहार रेडक्रॉस के पास काफी मात्र में प्लाज्मा उपलब्ध है, जबकि महाराष्ट्र में इसकी आवश्यकता है। बिहार में प्लाज्मा की उपयोगिता बहुत कम है, इसलिए उसे महाराष्ट्र भेजने का निर्णय लिया गया है। बिहार के लोगों के खून से तैयार प्लाज्मा का उपयोग महाराष्ट्र के मरीजों की जान बचाने के लिए किया जाएगा।


गुजरात से बिहार आ रहे लोग

बिहार रेडक्रॉस के डॉ. विनय बहादुर सिन्हा के अनुसार रेडक्रॉस के पास काफी मात्र में प्लाज्मा और फैक्टर-8 है। अधिकतम तीन वर्षो बाद यह प्लाज्मा बेकार हो जाएगा। प्लाज्मा बेकार न हो इसके लिए संस्थान ने रिलायंस हेल्थकेयर के साथ समझौता किया है। कंपनी को प्लाज्मा लीटर के हिसाब से दिया जाएगा। एक लीटर प्लाज्मा लगभग छह यूनिट के बराबर होता है। समझौते के तहत एक लीटर प्लाज्मा की दर 1700 रुपए निर्धारित की गई है।

प्लाज्मा से तैयार की जाती लिवर की दवा : डॉ. सिन्हा ने बताया कि प्लाज्मा का उपयोग कई बीमारियों में विभिन्न तरह से किया जाता है। महाराष्ट्र में जिन मरीजों को प्लाज्मा की जरूरत होगी, उन्हें चिकित्सकों की सलाह से दिया जाएगा। जो प्लाज्मा बच जाएगा, उससे एल्बुमिन नामक प्रोटीन बनाया जाएगा। उसका उपयोग लिवर के मरीजों के लिए किया जाएगा। एल्बुमिन प्रोटीन का उपयोग कुपोषण के शिकार मरीजों के लिए भी किया जाता है।

फैक्टर-8 बनाएगा रेडक्रॉस : सूबे में फैक्टर-8 की समस्या बनी हुई है। फैक्टर-8 की जरूरत हीमोफीलिया के मरीजों को होती है। राज्यभर से हीमोफीलिया के मरीज पीएमसीएच में आते हैं, लेकिन उन्हें फैक्टर-8 नहीं मिल पा रहा है। डॉ. विनय बहादुर ने बताया कि पीएमसीएच की मांग पर वे फैक्टर-8 बनवा सकते हैं। इसके लिए रेडक्रॉस में पास अत्याधुनिक मशीन है। मालूम हो कि पीएमसीएच में डीप फ्रीजर खराब होने के कारण न तो प्लाज्मा बन पा रहा है न ही फैक्टर।

माइनस 40 डिग्री पर रखा जाता प्लाज्मा : प्लाज्मा को डीप फ्रीज में माइनस 40 डिग्री सेल्सियस पर रखा जाता है। इस स्थिति में उसे एक साल तक रखा जा सकता है। उससे अधिक दिन तक रखने के लिए माइनस 80 डिग्री पर रखने की जरूरत होती है। इस तापमान पर तीन साल तक प्लाज्मा को रखा जा सकता है।

एक यूनिट ब्लड को बांटा जाता चार भाग में : बिहार रेडक्रॉस द्वारा एक यूनिट ब्लड को चार भागों में बांटा जाता है। इसके लिए रेडक्रॉस में एक करोड़ की लागत से हाईटेक ब्लड सेपरेटर मशीन लगाई गई है। इस मशीन से एक यूनिट ब्लड से पैक्ड रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लेटलेट्स, प्लाज्मा एवं फैक्टर-8 तैयार किया जाता है। इसके बाद ही उपयोग में लाया जाता है।

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