बिहार के इन युवाओं का प्रयास अपने आप में एक बड़ी प्रेरणा है, लोगों को दे रहे नया जीवन

एक बिहारी सब पर भारी कही-सुनी जागरूकता

कहा जाता है कि रक्तदान महादान है और इससे बड़ा कोई दान नहीं। एक अनुमान के मुताबिक देश में हर रोज 38,000 लोगों को रक्त की जरूरत होती है। लेकिन सिर्फ़ दस फीसद लोगों को ही यह उपलब्ध हो पाती है। इसी असंतुलित आंकड़ों को कम करने के लिये एक छोटा सा प्रयास बिहार के कुछ युवा कर रहे हैं। मूल रूप से सहरसा निवासी शैलेश झा और रौशन झा ने एक मुहिम शुरू की है जिसके जरिये ज़रूरतमंदों को रक्त दान किया जाता है। यह कोई बहुत बड़ी संस्था नहीं है। सीधे शब्दों में कहें तो कुछ लोगों का एक बड़े मकसद के लिये एक छोटा सा प्रयास।

उन्होंने इस मुहिम की शुरुआत 15 फरवरी 2015 को किया था लेकिन पुनः पूर्ण रूप से 1 जुलाई 2017 से शुरू हुआ। फिर रक्तदान एक मैन मुहिम के रूप में लिया गया। 23 जुलाई 2017 को महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद की जयंती के अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ जिसमें 55 यूनिट रक्तदान किया गया। उस दिन से लगातार रक्तदान किया रहा है। किसी किसी दिन तो जरूरतमंदों को 6 यूनिट तक डोनट किया गया है।

लोग रक्त के लिये व्हाट्सएप्प नंबर पर और मंच के सदस्यों से संपर्क करते हैं। अगर उनके साथ कोई व्यक्ति होता है तो उनके किसी भी ग्रुप के ब्लड के बदले उनके जरूरत का ग्रुप उनको उपलब्ध करवाया जाता है।हेमोग्लोबिन स्तर की जांच का पुर्जा देख के रक्त की आपूर्ति की जाती है। आपातकाल की स्थिति में किसी भी परिजन के नहीं रहने पर मंच के सदस्यों के द्वारा ब्लड डोनेट किया जाता है। इसी सप्ताह बीते रक्तदाता दिवस के अवसर पर भी 2 यूनिट रक्तदान करके ब्लड बैंक को सौंपा गया और साथ ही ब्लड बैंक के कर्मी को सम्मानित किया गया।

इससे जुड़े रौशन झा बताते हैं कि सदर अस्पताल में रक्त की कमी से एक महिला को तड़पते देख रक्तदान के लिये लोगों को जागरूक करने की ठानी थी। वो दिन में 6 यूनिट और अभी तक 600 यूनिट रक्त लोगों को उपलब्ध करा चुके हैं। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य की चिंता किये बगैर वो खुद साल में 5 बार रक्त दान करते हैं। सबसे बड़ी बात की इस रक्तदान के एवज में मरीज के द्वारा दिया गया जल तक नहीं लेते दान मतलब सम्पूर्ण दान अपने कोष से रक्तदाता को पानी और ग्लूकोज़ तक उपलब्ध करवाते हैं।

जेम्स हैरिसन को अपनी प्रेरणास्त्रोत बताते हुए उन्होंने कहा कि हैरिसन ने 80 वर्ष की अवस्था तक साप्ताहिक रक्तदान किया। चंद्रशेखर आज़ाद के बलिदान का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह उनके रक्त का एक एक बूंद राष्ट्रहित में काम आया, हम सभी चाहते हैं कि हम भी उसी तरह अपना योगदान दे सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *